क्या है ‘दो दीवाने शहर में’ के पीछे की कला? जानें निर्देशक रवि उदयवार की सोच
फिल्म के अनोखे दृष्टिकोण पर रवि उदयवार की बातें
मुंबई, 21 फरवरी। हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘दो दीवाने शहर में’ के निर्देशक रवि उदयवार ने फिल्म के बारे में अपनी उत्सुकता व्यक्त की। उन्होंने फिल्म के विशेष विजुअल टेक्सचर, रंगों के पैलेट और पात्रों की गहराई को साझा किया। रवि का मानना है कि वह एक कलाकार हैं, जो फिल्म को एक कैनवस की तरह बनाते हैं।
प्रमोशन के दौरान, रवि ने मीडिया से बातचीत में कहा कि हर फिल्म का अपना एक अनूठा कैनवस होता है और वह खुद को एक आर्टिस्ट मानते हैं, जो पेंटिंग की तरह फिल्में तैयार करते हैं। उन्होंने बताया, “अभिरुचि चंद ने कहानी और स्क्रीनप्ले लिखा है। हमने एक साथ काफी समय बिताया। फिल्म में भावनात्मक उतार-चढ़ाव हैं। जैसे ही पात्रों का चयन होता है, कई चीजें अपने आप सही जगह पर आ जाती हैं।”
फिल्म की मुख्य थीम आत्म-स्वीकृति और वास्तविकता को स्वीकार करने पर केंद्रित है। रवि ने कहा, “आजकल लोग हमेशा अपने बेहतरीन पहलू को दिखाते हैं और कमियों को छिपाते हैं, लेकिन जब आप अपनी असली कमियों को दिखाते हैं और कहते हैं ‘मैं यही हूं’, तब असली संबंध बनता है। डर समाप्त हो जाता है और सब कुछ सरल हो जाता है। इस विचार को फिल्म के विजुअल्स में भी दर्शाया गया है।”
निर्देशक ने पात्रों के कपड़ों और रंगों के विकास पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा, “फिल्म में दिखाया गया है कि पात्र कैसे अपनी पहचान खोजते हैं। शुरुआत में उनके रंग अलग और फीके होते हैं, लेकिन जैसे-जैसे वे अपनी असली पहचान पाते हैं, उनके रंग और भी खूबसूरत हो जाते हैं। प्यार में पड़ने पर ये रंग और भी निखरते हैं। यह रंगों की खोज की एक खूबसूरत कहानी है।”
‘दो दीवाने शहर में’ एक ऐसी फिल्म है जो प्यार, आत्म-स्वीकृति और शहर की रोमांटिकता को एक साथ बुनती है। फिल्म में मुंबई शहर को भी एक महत्वपूर्ण पात्र के रूप में प्रस्तुत किया गया है। रवि ने कहा, “मुंबई का हमेशा एक नरम और रोमांटिक पक्ष रहा है। हमने शहर को एक पात्र की तरह इस्तेमाल किया है, जो कहानी को और गहराई प्रदान करता है।”