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क्या है फिल्म 'सितंबर-21' की कहानी? जानें कान्स फिल्म फेस्टिवल में इसकी खासियत!

फिल्म 'सितंबर-21' कान्स फिल्म फेस्टिवल में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए तैयार है। इस फिल्म के कलाकार प्रवीण सिंह सिसोदिया और अमित बहल ने फिल्म के सफर और इसकी कहानी के बारे में चर्चा की। यह फिल्म केवल एक बीमारी की कहानी नहीं है, बल्कि यह देखभाल करने वालों के संघर्ष और मानवीय रिश्तों की गहराइयों को भी उजागर करती है। जानें इस फिल्म की खासियत और कान्स में इसकी सफलता के बारे में।
 

फिल्म 'सितंबर-21' का कान्स फिल्म फेस्टिवल में प्रीमियर

मुंबई, 7 मई। भारतीय सिनेमा आजकल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहा है। इसी क्रम में, हिंदी-कन्नड़ फिल्म 'सितंबर-21' कान्स फिल्म फेस्टिवल में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए तैयार है। इस फिल्म के कलाकार प्रवीण सिंह सिसोदिया और अमित बहल ने इस अवसर पर मीडिया से बातचीत की, जिसमें उन्होंने फिल्म के सफर, अपनी भूमिकाओं और कान्स में मिली सफलता के बारे में चर्चा की।

अभिनेता अमित बहल ने कान्स फिल्म फेस्टिवल में प्रीमियर के बारे में कहा, "ईमानदारी से कहूं तो, हमने कभी नहीं सोचा था कि प्यार और मेहनत से बनी यह फिल्म इतनी बड़ी जगह तक पहुंचेगी। करेन क्षिति सुवर्णा के निर्देशन में यह एक बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि उनकी शॉर्ट फिल्म के बाद यह पहली फीचर फिल्म है जो कान्स में प्रदर्शित हो रही है।"

उन्होंने बताया कि फिल्म का निमंत्रण पत्र फ्रेंच में आया था, जिसे बाद में अनुवाद कर पूरी टीम और एनएफडीसी के साथ साझा किया गया। उन्होंने आशा व्यक्त की कि फिल्म को दर्शकों से शानदार प्रतिक्रिया मिलेगी।

फिल्म 'सितंबर 21' केवल एक बीमारी की कहानी नहीं है, बल्कि यह देखभाल करने वालों के संघर्ष और मानवीय रिश्तों की गहराइयों को भी उजागर करती है। प्रवीण सिंह सिसोदिया का मानना है कि यह फिल्म दर्शकों को न केवल शिक्षित करती है, बल्कि भावनात्मक रूप से भी जोड़ती है।

उन्होंने कहा, "इसमें हल्के-फुल्के पल, हास्य और अपनापन है, लेकिन साथ ही, यह अल्जाइमर की वास्तविकता और देखभाल करने वालों की चुनौतियों को भी दर्शाती है। यह एक बौद्धिक और भावनात्मक रूप से गहरी फिल्म है, जो इसे एक अद्वितीय अनुभव बनाती है। इस फिल्म में मैं एक अल्जाइमर मरीज का किरदार निभा रहा हूं। रिसर्च से लेकर कैमरे के सामने उस दर्द को जीने तक, यह सफर मेरे लिए बहुत गहरा रहा है। यह एक ऐसी कहानी है, जो सीधे दिल को छूती है।"

अमित बहल ने इस फिल्म को अपने करियर की सबसे महत्वपूर्ण फिल्मों में से एक बताया। उन्होंने कहा, "यह फिल्म केवल मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि समाज को सोचने और महसूस करने पर मजबूर करने के लिए बनाई गई है। शूटिंग के दौरान हमें नहीं पता था कि यह फिल्म कान्स फेस्टिवल तक पहुंचेगी। हमारा ध्यान बस ईमानदारी से अभिनय करने पर था। फिल्म की शैली के अनुसार अभिनय का तरीका बदलता है। यह फिल्म एक गंभीर मुद्दे पर आधारित है, इसलिए हमने स्वाभाविक अभिनय करने की कोशिश की। हर चीज को यथासंभव वास्तविक रखने का प्रयास किया गया है।"

--मीडिया चैनल

एनएस/एबीएम