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क्या है फिल्म 'सहिया' की कहानी जो सेंसर बोर्ड को कर रही है परेशान?

फिल्म 'सहिया', जो झारखंड के आदिवासी जीवन और प्रेम कहानी पर आधारित है, को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) से बार-बार आपत्तियों का सामना करना पड़ रहा है। निर्माता संजय शर्मा ने इन आपत्तियों को निराधार बताते हुए सवाल उठाया है कि एक प्रेम कहानी से देश की सुरक्षा को क्या खतरा हो सकता है। फिल्म की कहानी और उसके संदेश पर चर्चा करते हुए, उन्होंने सेंसर बोर्ड की बदलती आपत्तियों पर भी सवाल उठाए हैं। जानें इस विवाद के पीछे की पूरी कहानी और फिल्म के भविष्य के बारे में।
 

फिल्म 'सहिया' पर सेंसर बोर्ड की आपत्तियाँ

मुंबई, 31 अक्टूबर। झारखंड के मनमोहक जंगलों और आदिवासी जीवन की पृष्ठभूमि में बनी हिंदी फिल्म 'सहिया' एक बार फिर केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) की आपत्तियों में फंस गई है। प्रेम, मानवता और अहिंसा के संदेश पर आधारित इस फिल्म को पहले 27 अगस्त 2026 को प्रमाणन देने से मना कर दिया गया था। अब बॉम्बे हाई कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद 27 अक्टूबर को रिवाइजिंग कमेटी ने भी इसे प्रमाणित करने से इनकार कर दिया है। 29 अक्टूबर को जारी पत्र में फिल्म के कथानक, नक्सलवाद, सुरक्षा बलों के चित्रण और आदिवासी समुदाय से संबंधित नई आपत्तियाँ उठाई गई हैं।


निर्माता का बयान

फिल्म के निर्माता और निर्देशक संजय शर्मा ने इन आपत्तियों को निराधार और असंगत बताते हुए सवाल उठाया है कि एक प्रेम कहानी से देश की सुरक्षा को क्या खतरा हो सकता है? उन्होंने कहा कि 'सहिया' किसी राजनीतिक विचारधारा का प्रचार नहीं करती, बल्कि यह प्रेम और मानवता की कहानी है। फिल्म में नक्सलवाद का समर्थन नहीं किया गया है और न ही किसी हिंसक संगठन का महिमामंडन किया गया है। इसके विपरीत, इसका मूल संदेश हिंसा का विरोध और मानव जीवन का सम्मान है।


फिल्म की कहानी का रहस्य

संजय शर्मा ने कहा कि फिल्म की कहानी और उसके महत्वपूर्ण मोड़ों का खुलासा करना उचित नहीं होगा, क्योंकि वे चाहते हैं कि दर्शक सिनेमाघरों में जाकर इस प्रेम कहानी का अनुभव करें। लेकिन यह स्पष्ट है कि 'सहिया' बंदूक और हिंसा का समर्थन नहीं करती। यह प्रेम की ताकत और मानवता की संवेदनाओं को उजागर करती है।


सेंसर बोर्ड की आपत्तियों पर सवाल

निर्माता ने सेंसर बोर्ड की बदलती आपत्तियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि पहली बार फिल्म देश की संप्रभुता के लिए खतरा थी, तो दूसरी बार ये आरोप कहाँ गए? उन्होंने कहा कि फिल्म में आदिवासी महिलाओं को साहसी और मजबूत व्यक्तित्व के रूप में दिखाया गया है, इसलिए उनके अपमान का आरोप अनुचित है।


आदिवासी संस्कृति का सम्मान

संजय शर्मा ने कहा कि फिल्म की पृष्ठभूमि आदिवासी समाज से जुड़ी है और इसमें आदिवासी संस्कृति तथा लोकसंगीत को विशेष महत्व दिया गया है। फिल्म में पारंपरिक कुरुख और उरांव लोकसंगीत का उपयोग किया गया है। आदिवासी कलाकारों की भागीदारी से इस सांस्कृतिक विरासत को सम्मानपूर्वक प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।


फिल्म का भविष्य

फिल्म 'सहिया' को 18 सितंबर 2026 को रिलीज करने की योजना थी, लेकिन प्रमाणन विवाद के कारण यह समय पर नहीं हो सकी। संजय शर्मा ने कहा कि एक फिल्म बनाने में बहुत से लोगों की मेहनत और रचनात्मक ऊर्जा लगती है। जब फिल्म तैयार हो जाए और उसे बार-बार अलग-अलग आपत्तियों में उलझा दिया जाए, तो यह बेहद पीड़ादायक होता है।


सेंसर बोर्ड से अपील

संजय शर्मा ने कहा कि वे सेंसर बोर्ड की किसी उचित और स्पष्ट आपत्ति पर विचार करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि यदि आवश्यक हो, तो फिल्म को 'ए' प्रमाणपत्र या यूए 16+ श्रेणी में प्रमाणित किया जा सकता है।