क्या है फिल्म 'पराशक्ति' का संदेश? जानें तमिलनाडु के एंटी-हिंदी आंदोलन की कहानी
फिल्म 'पराशक्ति' का ऐतिहासिक संदर्भ
चेन्नई, 14 जनवरी। तमिल सिनेमा में अक्सर इतिहास और राजनीति के मुद्दों पर आधारित फिल्में बनाई जाती हैं। हाल ही में एक ऐसी ही फिल्म 'पराशक्ति' रिलीज हुई है, जो 1960 के दशक के एंटी-हिंदी आंदोलन को दर्शाती है। यह आंदोलन इस बात का विरोध करता था कि हिंदी को देश की एकमात्र आधिकारिक भाषा नहीं बनाया जाना चाहिए।
फिल्म में इस संवेदनशील मुद्दे को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया गया है। इसे सुधा कोंगरा ने निर्देशित किया है, जो अपने सामाजिक संदेश देने वाले कंटेंट के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने फिल्म के बारे में बात करते हुए कहा कि इसमें कांग्रेस के नेताओं को नकारात्मक रूप में नहीं दिखाया गया है।
सुधा ने कहा, ''फिल्म में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को एक महान नेता के रूप में दर्शाया गया है। यह फिल्म दर्शकों को यह दिखाती है कि कैसे इन नेताओं ने लोकतंत्र और विश्वास के मूल्यों को बनाए रखा।''
हाल ही में तमिलनाडु यूथ कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि फिल्म में उनके नेताओं को गलत तरीके से पेश किया गया है। इस पर सुधा ने स्पष्ट किया कि यह दावा गलत है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नेहरू ने वादा किया था कि जब तक दक्षिण भारत के लोग सहमत नहीं होंगे, हिंदी अकेली आधिकारिक भाषा नहीं बनेगी।
सुधा ने आगे कहा, ''फिल्म में इंदिरा गांधी का एक महत्वपूर्ण दृश्य है, जहां वे कहती हैं, 'रुको!' और भाषण देती हैं। यह दर्शाता है कि लोकतांत्रिक नेता का काम केवल आदेश देना नहीं, बल्कि लोगों की बात सुनना और सही निर्णय लेना भी है।''
उन्होंने यह भी कहा कि नेहरू और इंदिरा गांधी दोनों ही सकारात्मक और लोकतांत्रिक नेता थे। फिल्म में उन्हें तानाशाह के रूप में नहीं दिखाया गया है।
फिल्म में शिवकार्तिकेयन और श्रीलीला मुख्य भूमिकाओं में हैं, जबकि रवि मोहन खलनायक के रूप में नजर आएंगे।
यह फिल्म पोंगल के त्योहार के अवसर पर 10 जनवरी को रिलीज हुई।