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क्या है 'पल भर के लिए' फिल्म का जादू? विनीत कुमार सिंह ने किया खुलासा!

अभिनेता विनीत कुमार सिंह की नई फिल्म 'पल भर के लिए' का वर्ल्ड प्रीमियर ऑस्ट्रेलिया के इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ मेलबर्न में होने जा रहा है। विनीत ने इस अवसर पर अपनी खुशी व्यक्त की और उम्मीद जताई कि फिल्म की कहानी वैश्विक दर्शकों के दिलों को छू लेगी। फिल्म का निर्देशन विक्रम फडनिस ने किया है, जिसमें सैयामी खेर और ताहिर राज भसीन भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में हैं। विनीत ने हिंदी भाषा के प्रति अपने प्रेम को भी साझा किया है।
 

विनीत कुमार सिंह की नई फिल्म का अंतरराष्ट्रीय मंच पर आगाज़




मुंबई, 27 जुलाई। अभिनेता विनीत कुमार सिंह ने अपने करियर में हमेशा ऐसे किरदारों का चयन किया है जो दर्शकों के दिलों में एक खास स्थान बना लेते हैं। 'मुक्काबाज', 'छावा', 'सुपरबॉयज ऑफ मालेगांव' और 'जाट' जैसी फिल्मों में अपनी अदाकारी से छाप छोड़ने वाले विनीत अब एक नई फिल्म 'पल भर के लिए' के साथ चर्चा में हैं, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित होने जा रही है।


इस फिल्म का वर्ल्ड प्रीमियर ऑस्ट्रेलिया में इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ मेलबर्न (आईएफएफएम) में होने वाला है। इस अवसर पर विनीत ने अपनी खुशी व्यक्त की और आशा जताई कि फिल्म की कहानी वैश्विक दर्शकों के दिलों को छू लेगी।


विनीत कुमार सिंह ने कहा, ''जब किसी फिल्म का सफर अंतरराष्ट्रीय मंच से शुरू होता है, तो यह एक विशेष अनुभव होता है। 'पल भर के लिए' एक ऐसी कहानी है जो हमारी पूरी टीम के लिए महत्वपूर्ण है और समाज से जुड़े मुद्दों को उजागर करती है। मुझे गर्व है कि फिल्म की पहली प्रस्तुति आईएफएफएम जैसे प्रतिष्ठित मंच पर होगी। मुझे उम्मीद है कि यह कहानी विभिन्न देशों और संस्कृतियों के लोगों के दिलों तक पहुंचेगी।''


इस फिल्म का निर्देशन प्रसिद्ध फिल्मकार और डिजाइनर विक्रम फडनिस ने किया है। फिल्म में विनीत कुमार सिंह के साथ सैयामी खेर और ताहिर राज भसीन भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आएंगे। फिल्म को आधिकारिक रूप से आईएफएफएम में वर्ल्ड प्रीमियर के लिए चुना गया है।


विनीत कुमार सिंह के बारे में बात करें, तो वह अपने अभिनय के साथ-साथ हिंदी भाषा के प्रति अपने गहरे प्रेम के लिए भी जाने जाते हैं। हाल ही में उन्होंने बॉलीवुड में हिंदी फिल्मों की स्क्रिप्ट रोमन लिपि में लिखे जाने पर अपनी राय साझा की थी।


उन्होंने कहा, ''मैं हमेशा चाहता हूं कि मेरे डायलॉग्स देवनागरी लिपि में हों। मुझे उसी में पढ़ने और समझने में आसानी होती है। मेरा मानना है कि जब फिल्म हिंदी में बनाई जा रही है, तो उसकी स्क्रिप्ट और डायलॉग भी हिंदी की अपनी लिपि में होने चाहिए।''


उन्होंने आगे कहा, ''हर कलाकार की अपनी पसंद हो सकती है, लेकिन मुझे लगता है कि हिंदी फिल्मों का काफी काम आज भी अंग्रेजी में होता है। हिंदी भाषा को उसकी अपनी लिपि में सम्मान मिलना चाहिए।''