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क्या है 'दादी की शादी' में खास? कपिल शर्मा और नीतू कपूर की दिल छू लेने वाली कहानी

फिल्म 'दादी की शादी' कपिल शर्मा और नीतू कपूर के साथ एक दिलचस्प पारिवारिक कहानी प्रस्तुत करती है। यह फिल्म रिश्तों की जटिलताओं, भावनाओं और हास्य का अनूठा मिश्रण है। दादी के शादी के फैसले से परिवार में हलचल मच जाती है, और यह कहानी दर्शकों को परिवार और जिंदगी को नए दृष्टिकोण से देखने के लिए प्रेरित करती है। जानें इस फिल्म में क्या खास है और क्यों यह दर्शकों का दिल जीत रही है।
 

फिल्म 'दादी की शादी' का रिव्यू




आईएएनएस रेटिंग- 4 स्टार्स


कपिल शर्मा और नीतू कपूर की नई फिल्म 'दादी की शादी' एक दिलचस्प पारिवारिक कहानी प्रस्तुत करती है, जिसमें हास्य, भावनाएं और रिश्तों की जटिलताएं खूबसूरती से दर्शाई गई हैं। फिल्म की शुरुआत हल्के-फुल्के अंदाज में होती है, लेकिन यह धीरे-धीरे एक गहरे इमोशनल सफर में बदल जाती है, जो दर्शकों को परिवार और रिश्तों को नए दृष्टिकोण से देखने के लिए प्रेरित करती है।


कहानी कपिल शर्मा के किरदार के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपनी अरेंज मैरिज की तैयारी कर रहा है। इसी दौरान उसकी मुलाकात सादिया खातिब से होती है, जिससे उसका रिश्ता तय होने वाला है। दोनों परिवार शादी की रस्मों की तैयारी कर रहे होते हैं, लेकिन अचानक एक मोड़ आता है जो सब कुछ बदल देता है।


सादिया की दादी अचानक शादी करने का निर्णय ले लेती हैं, जिससे परिवार में हलचल मच जाती है। यह निर्णय परिवार के सभी सदस्यों को चौंका देता है और यहीं से फिल्म की असली कहानी शुरू होती है।


कहानी आगे बढ़ते हुए शिमला पहुंचती है, जहां दादी अकेली रहती हैं। जब उनके बच्चों को पता चलता है कि उनकी मां इस उम्र में दोबारा शादी करना चाहती हैं, तो सभी घबराकर शिमला पहुंच जाते हैं। इस तनाव के बीच कई मजेदार और भावुक पल सामने आते हैं।


कपिल शर्मा का किरदार इस पूरे मामले में उलझ जाता है। वह सादिया से प्यार करता है और उससे शादी करना चाहता है, लेकिन परिवार को लगता है कि दादी का यह निर्णय उनके रिश्ते को प्रभावित करेगा। इस स्थिति में कपिल दादी की शादी रोकने के मिशन में परिवार के साथ शामिल हो जाता है।


फिल्म में पीढ़ियों के बीच सोच के फर्क को दर्शाया गया है। एक ओर पुराने विचारों वाले परिवार के लोग हैं, जबकि दूसरी ओर दादी हैं, जो अपनी जिंदगी अपनी शर्तों पर जीना चाहती हैं। यही टकराव फिल्म को भावनात्मक गहराई प्रदान करता है।


परफॉर्मेंस की बात करें तो नीतू कपूर ने दादी के किरदार में आत्मविश्वास और भावनाओं को बखूबी पेश किया है। कपिल शर्मा ने अपनी कॉमिक टाइमिंग के साथ-साथ इमोशनल सीन में भी अच्छा संतुलन बनाया है। सादिया खातिब ने भी अपने किरदार को सच्चाई के साथ निभाया है।


फिल्म का निर्देशन आशीष आर मोहन ने किया है, जिन्होंने कहानी को सरल और वास्तविक तरीके से प्रस्तुत किया है। फिल्म का संगीत और बैकग्राउंड स्कोर भी कहानी के साथ मेल खाता है।


कुल मिलाकर, 'दादी की शादी' एक ऐसी पारिवारिक फिल्म है जो हंसाने के साथ-साथ भावुक भी करती है। यह रिश्तों और जिंदगी को खुलकर जीने का संदेश देती है।


--आईएएनएस


पीके/एएस