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क्या है 'द इंडिया स्टोरी: स्लो पॉइजन' का रहस्य? जानें इस फिल्म के पीछे की सच्चाई!

फिल्म 'द इंडिया स्टोरी: स्लो पॉइजन' ने अपने टीजर के जरिए एक गंभीर सामाजिक मुद्दे को उजागर किया है। यह फिल्म दिखाती है कि कैसे रोजमर्रा के खाने में मिल रहे जहर और कीटनाशकों का लोगों की जिंदगी पर गहरा असर पड़ रहा है। कोर्टरूम ड्रामा और व्यक्तिगत पीड़ा के साथ, यह फिल्म न्याय की तलाश में एक पिता की कहानी को बयां करती है। जानें इस फिल्म के पीछे की सच्चाई और इसके प्रभाव को, जो 24 जुलाई को रिलीज होने वाली है।
 

फिल्म का टीजर और सामाजिक मुद्दे


मुंबई, 26 जून। सामाजिक विषयों पर आधारित फिल्म 'द इंडिया स्टोरी: स्लो पॉइजन' ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया है। इसके निर्माताओं ने हाल ही में फिल्म का टीजर जारी किया है, जिसमें यह दर्शाया गया है कि कैसे रोजमर्रा के भोजन में मिल रहे जहर और कीटनाशकों का लोगों के जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।


टीजर की शुरुआत एक बड़े विरोध प्रदर्शन से होती है, जहां किसान और आम लोग वकील अर्चना (काजल अग्रवाल) के खिलाफ अपनी नाराजगी व्यक्त करते हैं। भीड़ उनकी गिरफ्तारी की मांग करती है और गुस्से में उनके पोस्टरों पर कालिख पोतती है।


इसके बाद कोर्टरूम का दृश्य प्रस्तुत किया जाता है, जहां श्रेयस तलपड़े का किरदार योगेश पांडे अपनी याचिका पेश करता है। योगेश का कहना है कि उसकी सात साल की बेटी की कैंसर से मौत हुई, जिसे वह हत्या मानता है, क्योंकि मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार, उसकी बेटी की मौत का कारण खाने-पीने की चीजों में मिलावट थी। इसमें फल, सब्जियां, दूध और दही जैसे रोजमर्रा के खाद्य पदार्थों में मौजूद जहरीले तत्वों का उल्लेख किया गया है, जो धीरे-धीरे गंभीर बीमारियों का कारण बन रहे हैं।


इस मामले की पैरवी वकील अर्चना करती हैं, जो कोर्ट में अपने तर्कों के साथ मजबूती से खड़ी होती हैं। वह कहती हैं, 'फल-सब्जियां किसानों के माध्यम से आती हैं, और जो कंपनियां कीटनाशक बनाती हैं, और सरकार जो उन्हें अनुमति देती है, वे भी जिम्मेदार हैं।'


टीजर में श्रेयस तलपड़े के किरदार योगेश पांडे की व्यक्तिगत पीड़ा भी दिखाई गई है। वह अपनी बीमार बेटी के इलाज के लिए अस्पतालों के चक्कर लगाता है, लंबी लाइनों में खड़ा होता है, और मदद की उम्मीद में भटकता है। जब उसकी बेटी की मौत हो जाती है, तो उसका दर्द और बढ़ जाता है। न्याय के लिए पुलिस स्टेशन जाने पर उसकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया जाता, और उसकी फाइलें फेंक दी जाती हैं। यह दृश्य सिस्टम की खामियों को उजागर करता है और एक आम व्यक्ति की बेबसी को दर्शाता है।


टीजर में एक प्रभावशाली संवाद सुनाई देता है, जिसमें श्रेयस तलपड़े कहते हैं, 'हरित क्रांति के नाम पर जो जहर का तूफान उठा है, वह रुकने का नाम नहीं ले रहा।'


टीजर के अंत में एक चौंकाने वाला दृश्य भी है, जहां प्रदर्शन के दौरान एक महिला काजल अग्रवाल को थप्पड़ मार देती है।


फिल्म 'द इंडिया स्टोरी: स्लो पॉइजन' की कहानी पेस्टिसाइड खेती और खाद्य पदार्थों में मिलावट के गंभीर मुद्दों पर आधारित है। यह फिल्म यह दर्शाने का प्रयास करती है कि कैसे आधुनिक कृषि और रासायनिक पदार्थ धीरे-धीरे मानव स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहे हैं, और इसका सबसे बड़ा प्रभाव आने वाली पीढ़ियों पर पड़ सकता है।


यह फिल्म जी स्टूडियोज और एमआईजी प्रोडक्शन एंड स्टूडियोज के बैनर तले बनाई गई है, जिसे सागर बी. शिंदे ने लिखा और निर्मित किया है। यह फिल्म 24 जुलाई को हिंदी, तेलुगु और तमिल भाषाओं में विश्वभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी।