क्या है जिश्नु श्रीकुमार और जितिन के. जोस का फिल्म महोत्सव का अनुभव?
अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में मलयालम सिनेमा की छाप
नई दिल्ली, 27 मार्च। भारत मंडपम में आयोजित अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में मलयालम फिल्म इंडस्ट्री के अभिनेता जिश्नु श्रीकुमार और लेखक-निर्देशक जितिन के. जोस ने मीडिया से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने फिल्म समारोह के अनुभव, दर्शकों की बदलती रुचियों और ओटीटी प्लेटफॉर्म के प्रभाव पर चर्चा की।
जिश्नु श्रीकुमार ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, "यहां आना हमारे लिए एक नया अनुभव है, लेकिन हम पहले भी कई प्रमुख फिल्म उत्सवों में भाग ले चुके हैं। हर बार इस तरह के समारोह में आना सुखद होता है। हमें उम्मीद है कि भारत में और भी ऐसे प्रतिष्ठित फिल्म आयोजन होंगे।"
लेखक-निर्देशक जितिन के. जोस ने कहा कि यहां की व्यवस्थाएं और अन्य पहलू बेहद उत्कृष्ट हैं। उन्होंने कहा, "हम निश्चित रूप से फिर से यहां आएंगे।"
जब मीडिया ने उनसे पूछा कि क्या फिल्मों में साउंड और आवाज का स्तर हमेशा सही होता है, तो जितिन ने कहा, "इंटरनेट क्रांति के बाद दर्शकों में सिनेमा को समझने की जागरूकता बढ़ी है। अब वे सिनेमैटिक अनुभव को बेहतर तरीके से समझते हैं।"
जितिन ने आगे कहा, "पहले भाषा और संस्कृति की बाधाएं थीं, लेकिन अब लोग आसानी से दूसरी भाषाओं की फिल्में देख और समझ सकते हैं।"
जब ओटीटी प्लेटफॉर्म के प्रभाव पर चर्चा हुई, तो जितिन ने कहा, "बिल्कुल, मेरी फिल्म के रिलीज के बाद मुझे उत्तरी भारत और अन्य क्षेत्रों से कई संदेश मिले। ओटीटी की वजह से हमारी फिल्म की पहुंच बढ़ी है।"
उन्होंने कहा, "अब हमारा दर्शक वर्ग केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश और दुनिया में फैला हुआ है। इससे हमें नए प्रयोग करने की अधिक स्वतंत्रता और उत्साह मिला है।"