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क्या है 'छेलेधोरा' की कहानी? स्वास्तिका मुखर्जी का नया अवतार दर्शकों को करेगा मंत्रमुग्ध!

बंगाली फिल्म 'छेलेधोरा' में स्वास्तिका मुखर्जी ने एक जटिल किरदार निभाया है, जो मां-बेटी के रिश्ते और आत्म-खोज की कहानी को दर्शाती है। फिल्म की शूटिंग 1 मार्च से शुरू होगी और इसमें बृष्टि नाम की एक तलाकशुदा महिला की यात्रा को दिखाया गया है। क्या बृष्टि अपनी बेटी को सुरक्षित वापस ला पाएगी? जानें इस फिल्म के बारे में और इसके पीछे की गहरी भावनाएं।
 

बंगाली फिल्म 'छेलेधोरा' की अनोखी कहानी




मुंबई, 27 फरवरी। भारतीय सिनेमा में महिलाओं के जटिल किरदारों को लेकर दर्शकों की रुचि बढ़ती जा रही है। इसी क्रम में, एक नई बंगाली फिल्म 'छेलेधोरा' चर्चा का विषय बनी हुई है, जो मां-बेटी के रिश्ते, अपराधबोध और आत्म-खोज जैसे गहरे भावनात्मक पहलुओं पर केंद्रित है। यह फिल्म एक इंडो-अमेरिकन प्रोडक्शन है और इसकी शूटिंग 1 मार्च से शुरू होने वाली है। इस फिल्म में प्रमुख भूमिका निभा रही हैं प्रसिद्ध अभिनेत्री स्वास्तिका मुखर्जी।


स्वास्तिका इस फिल्म में 'बृष्टि' नाम की एक तलाकशुदा महिला का किरदार निभा रही हैं, जो भावनात्मक रूप से जटिल और कई कमियों से भरी है।


फिल्म के बारे में स्वास्तिका ने कहा, "यह कहानी उन क्षणों की है जब इंसान खुद को सबसे कमजोर महसूस करता है, लेकिन उसी समय उसकी असली ताकत सामने आती है। बृष्टि एक ऐसा किरदार है जिसे पहली नजर में लोग पसंद नहीं कर सकते, क्योंकि वह जल्दबाजी में निर्णय लेती है और कई बार गलतियां करती है। लेकिन, अपनी बेटी के प्रति उसका प्यार सच्चा और गहरा है।"


कहानी में बृष्टि अपनी बेटी का जन्मदिन मनाने के लिए उसे बिना अनुमति अपने साथ ले जाती है। यह कदम वह भावनात्मकता में उठाती है, लेकिन हालात तब गंभीर हो जाते हैं जब बच्ची सच में किडनैप हो जाती है। इसके बाद, कहानी एक नया मोड़ लेती है। बृष्टि को अपनी गलती सुधारने और बेटी को वापस लाने के लिए असामान्य रास्ता अपनाना पड़ता है।


स्वास्तिका ने आगे बताया, "यह सफर केवल एक मां की खोज नहीं है, बल्कि एक महिला की आत्म-खोज की यात्रा भी है। फिल्म यह भी दर्शाती है कि कई बार माता-पिता अपनी कमियों को नहीं समझ पाते, लेकिन कठिन परिस्थितियां उन्हें आईना दिखा देती हैं।"


फिल्म का निर्देशन शिलादित्य मौलिक कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "'छेलेधोरा' माता-पिता की कहानी है। यह एक रोड जर्नी की तरह आगे बढ़ती है, जिसमें कई उतार-चढ़ाव और भावनात्मक मोड़ आते हैं। इसके केंद्र में हीलिंग, माफी और दूसरा मौका है। मेरा मानना है कि बच्चे कई बार बड़ों के लिए नैतिक दिशा दिखाने वाले बन जाते हैं और यह फिल्म उसी भावना को उजागर करती है।"


फिल्म की शूटिंग अरुणाचल प्रदेश के खूबसूरत शहरों ईटानगर और जीरो वैली में की जाएगी।


शिलादित्य मौलिक ने कहा, "अरुणाचल प्रदेश केवल प्राकृतिक सुंदरता के लिए नहीं, बल्कि वहां के प्रतिभाशाली कलाकारों और तकनीशियनों के लिए भी जाना जाता है। फिल्म की टीम में 14 सदस्य इसी क्षेत्र से हैं।"