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क्या है 'कृष्णावतारम' में संस्कृति जयना का अनोखा किरदार? जानें सत्यभामा की कहानी

संस्कृति जयना की नई फिल्म 'कृष्णावतारम' में उन्होंने सत्यभामा का किरदार निभाया है, जो भगवान कृष्ण के जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस फिल्म में दर्शकों को अनसुनी कहानियों से परिचित कराया जाएगा, जैसे कि छोटी दिवाली का इतिहास। संस्कृति ने बताया कि यह फिल्म न केवल सत्यभामा के दृष्टिकोण से है, बल्कि यह आज की महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है। जानें इस फिल्म के बारे में और भी दिलचस्प बातें!
 

संस्कृति जयना का नया अवतार




मुंबई, 28 मई। अभिनेत्री संस्कृति जयना इन दिनों अपनी नई फिल्म 'कृष्णावतारम' के कारण चर्चा में हैं। इस पौराणिक-ऐतिहासिक फिल्म में उन्होंने 'सत्यभामा' का महत्वपूर्ण किरदार निभाया है। फिल्म की कहानी सत्यभामा के दृष्टिकोण से प्रस्तुत की गई है।


संस्कृति ने एक बातचीत में बताया, "फिल्म में कई ऐसे प्रसंग शामिल हैं, जिनसे आम लोग भगवान कृष्ण के बारे में अनजान हैं। सत्यभामा भगवान श्री कृष्ण के जीवन का एक अहम हिस्सा रही हैं।"


उन्होंने छोटी दिवाली के महत्व पर भी प्रकाश डाला, "आज के समय में बहुत से लोग नहीं जानते कि भगवान श्री कृष्ण और सत्यभामा ने मिलकर नरकासुर का वध किया था, जिसके उपलक्ष्य में हम हर साल 'छोटी दिवाली' मनाते हैं। ये अनसुनी कहानियां आज की पीढ़ी के लिए महत्वपूर्ण हैं। इस फिल्म के माध्यम से वे अपनी समृद्ध विरासत से परिचित होंगे।"


जब संस्कृति से पूछा गया कि क्या आज का सिनेमा अपनी जड़ों से दूर हो रहा है, तो उन्होंने कहा, "मैं पूरी फिल्म इंडस्ट्री पर टिप्पणी नहीं कर सकती, लेकिन हम अपनी फिल्म के जरिए लोगों को संस्कृति और गौरवशाली इतिहास से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। मुझे इन कहानियों को 'पौराणिक कथाएं' कहना पसंद नहीं है, क्योंकि ये हमारे लिए इतिहास हैं।"


संस्कृति ने अपने किरदार के बारे में विस्तार से बताया कि सत्यभामा की यात्रा दर्शकों को न केवल उनके चरित्र को समझने में मदद करेगी, बल्कि भगवान कृष्ण, राधा रानी और रुक्मिणी जी के बीच के गहरे रिश्तों को भी उजागर करेगी। उन्होंने कहा, "मैं सत्यभामा से गहरा जुड़ाव महसूस करती हूं। वह सरल स्वभाव की थीं और अपनी भावनाओं को व्यक्त करने में कभी नहीं हिचकिचाती थीं।"


उन्होंने आगे कहा, "आज की महिलाएं उनके इस सफर से जुड़ाव महसूस करेंगी, क्योंकि वे भी अपनी आवाज और हिम्मत को खोजने की कोशिश कर रही हैं। सत्यभामा इसी ताकत और साहस की प्रतीक थीं।"