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क्या भारतीय सिनेमा को मिलेगी नई उड़ान? सूचना मंत्रालय के नए कदमों पर एक नज़र

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने भारतीय फिल्म उद्योग को सशक्त बनाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। एक उच्च स्तरीय अध्ययन समूह का गठन किया गया है, जिसका नेतृत्व प्रसून जोशी करेंगे। यह समूह भारतीय सिनेमा के सामने मौजूद अवसरों और चुनौतियों का अध्ययन करेगा। इसके साथ ही, मंत्रालय ने सिनेमा और थिएटर के नियमन के लिए एक मॉडल तैयार किया है, जिससे छोटे शहरों में सिनेमा बुनियादी ढांचे का विस्तार हो सके। जानें इन पहलों का भारतीय फिल्म उद्योग पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
 

भारतीय फिल्म इंडस्ट्री को मजबूती देने के लिए उठाए गए कदम


नई दिल्ली, 29 जून। भारतीय फिल्म उद्योग को सशक्त बनाने और देश में सिनेमा स्क्रीन की संख्या बढ़ाने के लिए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। मंत्रालय ने फिल्म निर्माण, वितरण और तकनीकी विकास को बढ़ावा देने के लिए एक उच्च स्तरीय अध्ययन समूह का गठन किया है, साथ ही राज्यों के लिए एक मॉडल सिनेमा नियमन भी तैयार किया है।


ये निर्णय केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव की अध्यक्षता में नई दिल्ली में हुई एक समीक्षा बैठक में लिए गए। इस बैठक में मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ फिल्म क्षेत्र से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई। मंत्री ने फिल्म निर्माण और वितरण प्रणाली को मजबूत करने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए।


गठित अध्ययन समूह की अध्यक्षता प्रसिद्ध गीतकार प्रसून जोशी करेंगे। इस समूह में फिल्म उद्योग के विशेषज्ञ, तकनीकी साझेदार और अन्य संबंधित क्षेत्रों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। यह समूह भारतीय सिनेमा के सामने मौजूद अवसरों और चुनौतियों का विश्लेषण करेगा और उद्योग को आगे बढ़ाने के लिए सुझाव देगा।


अध्ययन समूह का एक प्रमुख उद्देश्य भारतीय फिल्मों को वैश्विक बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना है। इसके साथ ही, समूह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और वर्चुअल प्रोडक्शन जैसी नई तकनीकों के प्रभाव का भी अध्ययन करेगा। यह सुझाव दिया जाएगा कि भारतीय फिल्म निर्माता इन तकनीकों का अधिकतम लाभ कैसे उठा सकते हैं।


समूह फिल्म निर्माताओं के लिए वित्तीय व्यवस्थाओं को सरल बनाने पर भी ध्यान देगा। इसमें संस्थागत वित्त उपलब्ध कराने, नए फंडिंग विकल्प विकसित करने और फिल्म निर्माण तथा वितरण के दौरान आने वाली आर्थिक चुनौतियों का समाधान खोजना शामिल है।


इसके अतिरिक्त, अध्ययन समूह राज्य सरकारों और अन्य हितधारकों के साथ समन्वय कर बेहतर प्रक्रियाओं की पहचान करेगा। यह समूह भारतीय सिनेमा के दीर्घकालिक विकास के लिए एक व्यापक नीतिगत ढांचा तैयार करने की दिशा में काम करेगा और तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट मंत्रालय को सौंपेगा।


मंत्रालय ने सिनेमा और थिएटर के नियमन को लेकर भी एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। चूंकि सिनेमा और थिएटर राज्य सूची के अंतर्गत आते हैं, इसलिए विभिन्न राज्यों में लाइसेंस और अनुमतियों के लिए अलग-अलग नियम लागू होते हैं। मंत्रालय के अनुसार, यह व्यवस्था छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में सिनेमा बुनियादी ढांचे के विस्तार में बाधा बनती रही है।


इस समस्या को हल करने के लिए मंत्रालय ने सभी हितधारकों से चर्चा के बाद एक मॉडल राज्य सिनेमा नियमन तैयार किया है। इसे सभी राज्य सरकारों को भेजा गया है और उनसे इसे अपनाने का अनुरोध किया गया है। मंत्रालय राज्यों को इन नियमों को लागू करने में सहयोग भी करेगा।


मंत्रालय का मानना है कि इन पहलों से भारतीय फिल्म उद्योग को आधुनिक, मजबूत और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद मिलेगी। इससे सिनेमा क्षेत्र में निवेश, तकनीकी विकास और नए अवसरों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।