क्या जानते हैं आप मिथुन के बारे में? जानें उनके संगीत सफर की अनकही बातें!
संगीत की दुनिया में मिथुन का सफर
मुंबई, 10 जनवरी। संगीत की बारीकियों को सात साल की उम्र से समझने वाले मिथुन ने बॉलीवुड में अपनी एक खास पहचान बनाई है। उनका मानना है कि किसी भी गाने की आत्मा मेलोडी में होती है, और इसके बिना कोई गाना अधूरा रह जाता है। प्रसिद्ध संगीतकार मिथुन का जन्मदिन 11 जनवरी को है।
11 साल की उम्र में उन्होंने संगीत की शिक्षा लेना शुरू किया और अपने पिता नरेश शर्मा के साथ स्टूडियो में समय बिताते थे। उनके पिता और दादा दोनों ही संगीत के क्षेत्र से जुड़े हुए थे। मिथुन के चाचा प्यारेलाल रामप्रसाद शर्मा, लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल की जोड़ी के एक सदस्य थे।
मिथुन ने अपने करियर की शुरुआत 2005 में फिल्म 'जहर' के गाने 'वो लम्हे' से की, जो एक रीक्रिएटेड ट्रैक था। इसके बाद 'कलियुग' में 'अब तो आदत सी है मुझको' जैसे गाने ने उन्हें पहचान दिलाई। असली सफलता उन्हें 2007 में फिल्म 'अनवर' के गानों 'तोसे नैना लागे' और 'मौला मेरे' से मिली, लेकिन 'तेरे बिन' गाने ने उन्हें एक नई पहचान दी। इस गाने को आतिफ असलम ने गाया था और इसने उन्हें पहला स्टारडस्ट अवॉर्ड दिलाया।
साल 2013 में 'आशिकी 2' का गाना 'तुम ही हो' मिथुन के करियर का एक और मील का पत्थर साबित हुआ। यह गाना आज भी लोगों के दिलों में बसा हुआ है। इसके अलावा, उन्होंने कई हिट फिल्मों के लिए संगीत दिया, जैसे 'अलोन', 'आल इज वेल', 'कयामत से कयामत तक', 'ट्रैफिक', 'शिवाय', 'हाफ गर्लफ्रेंड', 'एक विलेन', 'सनम रे', 'की एंड का', 'बागी 2', 'कबीर सिंह', 'खुदा हाफिज', 'राधे श्याम', और 'गदर 2'।
मिथुन ने गैर-फिल्मी एल्बम में भी काम किया है और आतिफ असलम तथा अभिजीत सावंत के साथ कई प्रोजेक्ट्स पर काम किया। उनकी धुनें हमेशा रोमांटिक और भावुक होती हैं, जो सुनने वालों को लम्बे समय तक याद रहती हैं। मिथुन मेलोडी को गाने की ताकत और आत्मा मानते हैं।
एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, “संगीत बनाना और सुनना एक प्रक्रिया है। हर गाने की एक आत्मा होती है। यह लोगों की पसंद पर निर्भर करता है, लेकिन बिना मेलोडी के गाना बन ही नहीं सकता। मेरा मानना है कि गाने की ताकत और आत्मा दोनों मेलोडी होती हैं।”
मिथुन ने 2022 में प्रसिद्ध गायिका पलक मुच्छल से विवाह किया।