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क्या एआई फिल्म निर्माण में क्रांति ला सकता है? मुंबई फिल्म महोत्सव में चर्चा

मुंबई में आयोजित 19वें अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की भूमिका पर गहन चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने एआई के अवसरों और चुनौतियों पर विचार किया, यह बताते हुए कि यह फिल्म निर्माण की प्रक्रिया को कैसे प्रभावित कर सकता है। प्रतिभागियों ने एआई की क्षमता को स्वीकार किया, लेकिन मानव रचनात्मकता की महत्वपूर्ण भूमिका पर भी जोर दिया। इस सत्र में एआई के कानूनी पहलुओं और नैतिक चिंताओं पर भी चर्चा की गई। जानें इस महत्वपूर्ण विषय पर और क्या कहा गया।
 

मुंबई फिल्म महोत्सव में एआई पर चर्चा


मुंबई, 16 जून। 19वें मुंबई अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (एमआईएफएफ) के दौरान भारतीय वृत्तचित्र फिल्मकार संघ ने 'क्या एआई रचनात्मकता का भविष्य है?' विषय पर एक ओपन फोरम का आयोजन किया।


इस सत्र में फायरफ्लाई क्रिएटिव स्टूडियो के सह-संस्थापक सनत पीसी, सोसाइटी ऑफ मोशन पिक्चर एंड टेलीविजन इंजीनियर्स के अध्यक्ष उज्ज्वल निर्गुडकर, अधिवक्ता हेतल देसाई सोलिया और फिल्मकार सुबोध मेनन ने फिल्म निर्माण और कंटेंट क्रिएशन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के अवसरों और चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया।


इस चर्चा में एआई की बढ़ती भूमिका पर ध्यान केंद्रित किया गया। प्रतिभागियों ने कहानी कहने की कला, फिल्म निर्माण प्रक्रियाओं और फिल्म उद्योग के भविष्य पर इसके प्रभावों का विश्लेषण किया। उन्होंने एआई की परिवर्तनकारी क्षमता को स्वीकार करते हुए कहा कि मानव रचनात्मकता और भावनात्मक बुद्धिमत्ता की भूमिका आज भी सबसे महत्वपूर्ण है।


सिनेमा के तकनीकी विकास पर बात करते हुए, उज्ज्वल निर्गुडकर ने एआई को फिल्म निर्माण की अगली स्वाभाविक अवस्था बताया। उन्होंने इसके पोस्ट-प्रोडक्शन में बढ़ते उपयोग का उल्लेख किया, जिसमें साउंड की गुणवत्ता, कलर करेक्शन और दृश्य गुणवत्ता में सुधार शामिल है। उन्होंने कहा कि एआई टूल्स तेजी से विकसित हो रहे हैं, लेकिन उद्योग को इनके मानकीकरण में समय लगेगा।


फैनबॉय पिक्चर्स के निर्देशक सुबोध मेनन ने कहा कि एआई कंटेंट तैयार कर सकता है और विचार-मंथन में मदद कर सकता है, लेकिन कहानी कहने की कला हमेशा मानवीय रहेगी। उन्होंने इसे नए विचार उत्पन्न करने का एक मूल्यवान उपकरण बताया।


फायरफ्लाई क्रिएटिव स्टूडियो के सह-संस्थापक सनत पीसी ने कहा कि एआई कहानी कहने की प्रक्रिया को बेहतर बना सकता है, क्योंकि यह चित्रों की गुणवत्ता और दर्शकों के अनुभव में सुधार लाने में सक्षम है। उन्होंने इसे एक सहायक उपकरण के रूप में इस्तेमाल करने की सलाह दी।


एआई-जनित सामग्री के कानूनी पहलुओं पर अधिवक्ता हेतल देसाई सोलिया ने लाइसेंस प्राप्त डेटा के उपयोग और रचनात्मक कार्यों में मानव भागीदारी के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कॉपीराइट स्वामित्व मानव रचनाकारों के पास रहना चाहिए।


सभी प्रतिभागियों ने सहमति व्यक्त की कि एआई को मानव रचनात्मकता का विकल्प नहीं, बल्कि उसका पूरक और सहयोगी मानना चाहिए। उन्होंने कहा कि एआई निर्माण प्रक्रियाओं को सरल बना सकता है, लेकिन कहानी कहने का वास्तविक सार मानव कल्पना और भावनाओं में निहित है।


परिचर्चा के बाद, श्रोताओं के साथ संवाद सत्र में प्रतिभागियों ने एआई अपनाने, नैतिक चिंताओं, कॉपीराइट संरक्षण और रचनात्मक व्यवसायों के भविष्य पर विचार किया।


सत्र का समापन इस सहमति के साथ हुआ कि फिल्मकारों को तकनीकी बदलाव अपनाने चाहिए, लेकिन कहानी कहने की प्रक्रिया में मानव रचनात्मकता को बनाए रखना चाहिए।