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क्या आपने देखी है 'गांधी, माई फादर'? अनिल कपूर ने अक्षय खन्ना की अदाकारी की की तारीफ!

बायोग्राफिकल ड्रामा 'गांधी, माई फादर' ने अपनी रिलीज के 19 साल पूरे कर लिए हैं। इस अवसर पर अनिल कपूर ने सोशल मीडिया पर अक्षय खन्ना की अदाकारी की सराहना की। उन्होंने फिल्म के पोस्टर के साथ दर्शकों से इसे देखने की अपील की। फिल्म महात्मा गांधी और उनके बेटे हरिलाल के बीच के जटिल रिश्ते को दर्शाती है। जानें इस फिल्म के बारे में और अनिल कपूर के विचार!
 

फिल्म 'गांधी, माई फादर' का 19वां सालगिरह


मुंबई, 3 अगस्त। बायोग्राफिकल ड्रामा 'गांधी, माई फादर' ने सोमवार को अपनी रिलीज के 19 साल पूरे कर लिए हैं। इस खास मौके पर फिल्म के निर्माता अनिल कपूर ने सोशल मीडिया पर फिल्म का जश्न मनाया और अक्षय खन्ना के अभिनय की प्रशंसा की।


अनिल कपूर ने अपने इंस्टाग्राम स्टोरीज पर फिल्म का पोस्टर साझा किया और अक्षय खन्ना को भारतीय फिल्म उद्योग के 'सर्वश्रेष्ठ अभिनेताओं' में से एक बताया। उन्होंने लिखा, "यदि आपने अभी तक इस फिल्म को नहीं देखा है, तो मैं सच में आशा करता हूँ कि आप इसे देखें। यह एक ऐसी फिल्म है जिस पर मुझे गर्व है, और यह हमेशा मेरे साथ रहेगी। इसे जरूर देखें।"


इसके अलावा, उन्होंने अक्षय खन्ना के साथ एक तस्वीर साझा करते हुए लिखा, "आज अक्षय खन्ना को दर्शकों से मिल रहे प्यार को देखकर मुझे बहुत खुशी हो रही है। मैंने हमेशा कहा है कि वह हमारे सबसे बेहतरीन अभिनेताओं में से एक हैं और 'गांधी, माई फादर' में उनकी अदाकारी अद्भुत थी। अगर आपने फिल्म देखी है, तो आप समझ गए होंगे कि मैं क्या कहना चाहता हूँ।"


यह फिल्म 2007 में फिरोज अब्बास खान द्वारा निर्देशित की गई थी और अनिल कपूर द्वारा निर्मित की गई थी। यह महात्मा गांधी और उनके सबसे बड़े बेटे हरिलाल गांधी के बीच के जटिल और दर्दनाक रिश्ते पर आधारित है। फिल्म में अक्षय खन्ना के साथ दर्शन जरीवाला, भूमिका चावला और शेफाली शाह भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में हैं।


निर्देशक ने इस फिल्म के माध्यम से महात्मा गांधी के महान व्यक्तित्व के साये में अपने बेटे हरिलाल की पहचान बनाने के संघर्ष और उनके बीच की भावनात्मक दूरियों को दर्शाया है।


यह फिल्म महात्मा गांधी की महानता के बजाय एक सामान्य इंसान और पिता के रूप में उनके पहलुओं को उजागर करती है। हरिलाल अपने पिता की विशाल छाया और कठोर सिद्धांतों के बीच अपनी पहचान बनाने के लिए संघर्ष करते नजर आते हैं। पिता-पुत्र के बीच बढ़ती दूरियों और हरिलाल के जीवन में आए त्रासद अनुभवों को बेहद संवेदनशीलता से प्रस्तुत किया गया है।