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क्या आप जानते हैं 'शम्मी आंटी' का असली नाम क्या था? जानें उनकी अनकही कहानी!

नरगिस रबादी, जिन्हें हम सभी 'शम्मी आंटी' के नाम से जानते हैं, का सफर बेहद दिलचस्प रहा है। 24 अप्रैल को उनकी जयंती के अवसर पर जानें उनके नाम के पीछे की कहानी और कैसे उन्होंने सहायक भूमिकाओं में अपनी पहचान बनाई। उनके जीवन के कई अनकहे पहलुओं पर एक नज़र डालें, जिसमें उनके परिवार, करियर की शुरुआत और दोस्ती की कहानियाँ शामिल हैं।
 

नरगिस रबादी: एक अद्वितीय सफर


मुंबई, 23 अप्रैल। हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में कई ऐसे कलाकार हैं जिन्होंने सहायक भूमिकाओं के माध्यम से दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई है। उनमें से एक हैं नरगिस रबादी, जिन्हें सभी 'शम्मी आंटी' के नाम से जानते हैं। उनके नाम के पीछे एक दिलचस्प कहानी है, जो उनकी जयंती 24 अप्रैल के अवसर पर जानने योग्य है।


जब नरगिस ने 18 साल की उम्र में फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा, तब उनका नाम 'नरगिस' था। लेकिन बाद में उन्हें अपना नाम बदलने की आवश्यकता पड़ी, और यही नाम परिवर्तन उनकी पहचान बन गया।


नरगिस रबादी का जन्म 24 अप्रैल 1929 को मुंबई में एक पारसी परिवार में हुआ। उनके पिता का निधन जब वह केवल तीन साल की थीं, जिसके बाद उनकी मां ने पारसी धार्मिक सभाओं में खाना बनाकर परिवार का पालन-पोषण किया। उनकी बड़ी बहन मणि रबादी एक फैशन डिजाइनर थीं और फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ी हुई थीं।


माध्यमिक शिक्षा पूरी करने के बाद, नरगिस ने एक कंपनी में सेक्रेटरी के रूप में काम करना शुरू किया। 18 साल की उम्र में उन्होंने फिल्म 'उस्ताद पेड्रो' से अपने करियर की शुरुआत की। फिल्म के निर्माता शेख मुख्तार ने उन्हें देखा और उनकी प्रतिभा से प्रभावित होकर उन्हें भूमिका दी। लेकिन उस समय एक समस्या आई, क्योंकि पहले से ही एक मशहूर अभिनेत्री नरगिस दत्त थीं। इस वजह से, शेख मुख्तार ने नरगिस रबादी को नाम बदलने का सुझाव दिया, और इसी दौरान उनका नाम 'शम्मी' पड़ा।


'उस्ताद पेड्रो' के बाद, उन्हें 'मल्हार' में मुख्य भूमिका मिली, जो गानों के कारण हिट रही। धीरे-धीरे, शम्मी की दोस्ती दिलीप कुमार और नरगिस दत्त जैसी बड़ी हस्तियों के साथ हो गई। 30 साल की उम्र में, उन्होंने फिल्म निर्माता सुल्तान अहमद से शादी की, लेकिन यह रिश्ता ज्यादा समय तक नहीं चला।


शुरुआत में लीड रोल करने वाली शम्मी बाद में सहायक भूमिकाओं में ज्यादा सफल रहीं। 'दिल अपना और प्रीत पराई', 'हाफ टिकट', 'द ट्रेन', 'कुदरत', और 'हम साथ-साथ हैं' जैसी फिल्मों में उनके किरदार आज भी याद किए जाते हैं। 90 के दशक और 2000 के शुरुआती सालों में, उन्होंने 'कुली नंबर 1', 'हम', 'गुरुदेव', और 'गोपी किशन' जैसी फिल्मों में दादी के किरदार से दर्शकों का दिल जीता। उन्होंने कुल 200 से अधिक फिल्मों में काम किया।


फिल्मों के अलावा, टीवी पर भी उनकी लोकप्रियता कम नहीं थी। 'देख भाई देख', 'जबान संभाल के', 'श्रीमान श्रीमती', 'कभी ये कभी वो', और 'फिल्मी चक्कर' जैसे शो में उनकी कॉमेडी टाइमिंग की सराहना हुई। उनकी प्यारी मुस्कान और सहज अभिनय ने उन्हें घर-घर में 'शम्मी आंटी' बना दिया। 2013 में, उन्होंने फिल्म 'शिरीन फरहाद की तो निकल पड़ी' में बोमन ईरानी के साथ काम किया।


6 मार्च 2018 को, 88 वर्ष की आयु में शम्मी आंटी ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया।