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क्या आप जानते हैं 'नमक हराम' के क्लाइमेक्स में राजेश खन्ना ने किया था बड़ा बदलाव?

फिल्म 'नमक हराम' के क्लाइमेक्स में राजेश खन्ना ने अहम बदलाव किया, जिससे अमिताभ बच्चन के किरदार को नया मोड़ मिला। जानें इस दिलचस्प कहानी के पीछे का सच और कैसे इस फिल्म ने दोनों सितारों के करियर को प्रभावित किया। ऋषिकेश मुखर्जी की इस फिल्म ने दर्शकों के दिलों में एक खास जगह बनाई है।
 

ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्म 'नमक हराम' का दिलचस्प किस्सा



नई दिल्ली, 30 सितंबर (वेब वार्ता)। हिंदी सिनेमा में कुछ फिल्में ऐसी होती हैं, जिनकी कहानी दर्शकों के मन में लंबे समय तक रहती है। ऋषिकेश मुखर्जी की 1973 में रिलीज हुई फिल्म 'नमक हराम' भी ऐसी ही एक फिल्म है। इस फिल्म में राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन की जोड़ी को दूसरी बार बड़े पर्दे पर देखा गया था। इससे पहले, दोनों को फिल्म 'आनंद' में काफी सराहा गया था। 'नमक हराम' की शूटिंग के दौरान, दोनों सितारों के बीच स्टारडम की बदलती स्थिति भी स्पष्ट हो गई थी।


उस समय राजेश खन्ना हिंदी सिनेमा के सबसे बड़े सुपरस्टार माने जाते थे, जबकि अमिताभ बच्चन अपने करियर की शुरुआत कर रहे थे। हालांकि, 'नमक हराम' ने दोनों के करियर की दिशा को बदल दिया।


फिल्म की शूटिंग के दौरान, ऋषिकेश मुखर्जी ने क्लाइमेक्स को गुप्त रखा। राजेश खन्ना बार-बार उनसे क्लाइमेक्स के बारे में पूछते रहे, लेकिन ऋषि दा ने राज नहीं खोला। अंततः राजेश खन्ना को पता चला कि फिल्म के अंत में अमिताभ बच्चन का किरदार मर जाता है।


यह जानकारी मिलते ही राजेश खन्ना चिंतित हो गए। उस समय फिल्मों में किसी किरदार की मौत का दर्शकों पर गहरा प्रभाव पड़ता था। राजेश खन्ना को लगा कि क्लाइमेक्स अमिताभ के किरदार के पक्ष में जा सकता है।


कहा जाता है कि इसके बाद राजेश खन्ना ने ऋषिकेश मुखर्जी से क्लाइमेक्स बदलने का अनुरोध किया। उस समय राजेश खन्ना का स्टारडम इतना बड़ा था कि उनकी बात को नजरअंदाज करना मुश्किल था। कहानी में बदलाव किया गया और फिल्म के अंत में राजेश खन्ना के किरदार की मौत दिखाई गई।


जब अमिताभ बच्चन को इस बदलाव की जानकारी मिली, तो वह खुश नहीं थे। इसके बाद फिल्म में कुछ और बदलाव किए गए और अमिताभ के किरदार को भी महत्वपूर्ण मोड़ दिया गया। दिलचस्प बात यह थी कि इन बदलावों की पूरी जानकारी राजेश खन्ना को नहीं दी गई।


जब फिल्म रिलीज हुई, तो दर्शकों ने अमिताभ बच्चन के अभिनय की सराहना की। राजेश खन्ना की मौत के बाद, अमिताभ का किरदार कहानी में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और बदला लेता है। यही कारण था कि फिल्म में राजेश खन्ना के होने के बावजूद चर्चा का बड़ा हिस्सा अमिताभ बच्चन के खाते में चला गया।


इस फिल्म के बाद दोनों के रिश्तों को लेकर कई किस्से सामने आए। कहा जाता है कि राजेश खन्ना इस बात से नाराज थे कि फिल्म में उनके किरदार की मौजूदगी के बावजूद अमिताभ बच्चन दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींचने में सफल रहे। इसके बाद दोनों ने एक साथ काम नहीं किया।


ऋषिकेश मुखर्जी का जन्म 30 सितंबर 1922 को कोलकाता में हुआ था। उनका अंदाज ऐसा था कि वह सिर्फ सितारों को ध्यान में रखकर फिल्में नहीं बनाते थे, बल्कि कहानी और किरदारों को प्राथमिकता देते थे। 'आनंद', 'गुड्डी', 'अभिमान', 'चुपके-चुपके' और 'गोलमाल' जैसी फिल्मों के जरिए उन्होंने मनोरंजन के साथ जिंदगी की सच्चाइयों को भी दर्शाया।


ऋषिकेश मुखर्जी ने कई कलाकारों को पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अमिताभ बच्चन के करियर में भी उनका योगदान खास माना जाता है। 27 अगस्त 2006 को ऋषिकेश मुखर्जी का निधन हो गया, लेकिन उनकी फिल्में आज भी दर्शकों को हंसाती हैं, भावुक करती हैं और जिंदगी को देखने का एक नया नजरिया देती हैं।