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क्या आप जानते हैं 'दिल दिया है जान भी देंगे' का संस्कृत संस्करण कब आया?

सुभाष घई ने अपने इंस्टाग्राम पर 'दिल दिया है जान भी देंगे ऐ वतन तेरे लिए' के संस्कृत संस्करण पर गर्व व्यक्त किया। यह गाना 1986 में फिल्म 'कर्मा' में शामिल किया गया था और अब इसे संस्कृत में भी प्रस्तुत किया गया है। जानें इस गाने की कहानी और इसकी लोकप्रियता के बारे में।
 

सुभाष घई ने साझा की गर्व की बात


मुंबई, 10 अगस्त। हिंदी सिनेमा ने कई देशभक्ति गीतों को पेश किया है, जिनमें से कुछ ने लोगों के दिलों में खास जगह बनाई है। इनमें से एक प्रसिद्ध गाना 'दिल दिया है जान भी देंगे ऐ वतन तेरे लिए' है, जिसे आज भी स्वतंत्रता और गणतंत्र दिवस पर गाया जाता है। इस गाने को लेकर निर्देशक और निर्माता सुभाष घई ने सोमवार को गर्व और खुशी व्यक्त की।


यह गाना फिल्म 'कर्मा' में शामिल किया गया था। सुभाष घई ने अपने इंस्टाग्राम पर फिल्म 'कर्मा' का पोस्टर साझा करते हुए अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने बताया कि उन्हें गर्व है कि इस गाने को संस्कृत में भी प्रस्तुत किया गया।


उन्होंने लिखा, "जब हमारी फिल्म 'कर्मा' का म्यूजिक एल्बम लॉन्च हुआ था, तब उसमें सभी सितारों के साथ-साथ लक्ष्मीकांत प्यारेलाल और आनंद बख्शी के भी सिग्नेचर थे। यह 1986 में हुआ था। उस एल्बम में एक राष्ट्रीय प्रतीकात्मक गाना 'दिल दिया है जान भी देंगे ऐ वतन तेरे लिए' आज भी भारत के हर राष्ट्रीय कार्यक्रम में गाया जाता है।"


सुभाष घई ने आगे कहा, "अब मुक्ता आर्ट को गर्व है कि हमने इसी गाने को संस्कृत में प्रस्तुत किया है। इसे कविता कृष्णमूर्ति जी ने गाया है और यूट्यूब पर इसे बहुत पसंद किया जा रहा है। इस आइकॉनिक गाने का आनंद लेने के लिए सभी का धन्यवाद।"


1986 में रिलीज हुई फिल्म 'कर्मा' में इस प्रसिद्ध देशभक्ति गीत का हिंदी संस्करण लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने संगीतबद्ध किया था, जबकि आनंद बख्शी ने इसके बोल लिखे थे। मोहम्मद अजीज और कविता कृष्णमूर्ति ने इसे गाया था।


इस गाने का संस्कृत संस्करण अगस्त 2023 में लॉन्च किया गया था। निर्देशक सुभाष घई ने इस कालजयी गाने को संस्कृत में तैयार करवाया, जिसे मूल गायिका कविता कृष्णमूर्ति ने अपनी आवाज दी।