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क्या आप जानते हैं 'गंगाजल' के इस दमदार सीन के पीछे की कहानी? अनूप सोनी ने किया खुलासा!

अनूप सोनी ने हाल ही में 'गंगाजल' फिल्म के एक महत्वपूर्ण सीन के बारे में जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि यह सीन एक ही टेक में शूट किया गया था और इसे बेहद वास्तविक और तनावपूर्ण बताया। फिल्म के निर्देशक प्रकाश झा हैं, और इसमें अजय देवगन जैसे बड़े सितारे शामिल हैं। जानें इस फिल्म की कहानी और इसके विवादों के बारे में।
 

अनूप सोनी का 'गंगाजल' पर खास पोस्ट


मुंबई, 29 मई। भारतीय सिनेमा में कई ऐसी फिल्में हैं, जिन्होंने दर्शकों को न केवल मनोरंजन किया, बल्कि समाज की कड़वी सच्चाइयों को भी उजागर किया। 2003 में रिलीज हुई 'गंगाजल' भी ऐसी ही एक फिल्म है। हाल ही में, अभिनेता अनूप सोनी ने इस फिल्म के बारे में एक विशेष पोस्ट साझा किया।


उन्होंने इस पोस्ट में बताया कि वह खुद को बेहद भाग्यशाली मानते हैं कि उन्हें इस ऐतिहासिक फिल्म का हिस्सा बनने का अवसर मिला।


अनूप सोनी ने इंस्टाग्राम पर फिल्म के एक महत्वपूर्ण सीन का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने बताया कि यह सीन एक ही टेक में शूट किया गया था।


उन्होंने लिखा, "आज शुक्रवार की यादों में 'गंगाजल' के सबसे प्रभावशाली सीन में से एक याद आ रहा है। जेल के लॉक-अप वाला यह सीन स्टेडीकैम पर एक ही टेक में शूट किया गया था। यह सीन बेहद वास्तविक, तनावपूर्ण और ऊर्जा से भरपूर था। ऐसे पल हमें याद दिलाते हैं कि कुछ फिल्में सालों बाद भी लोगों के दिलों में क्यों बनी रहती हैं। इस कल्ट फिल्म का हिस्सा बनने के लिए मैं खुद को सौभाग्यशाली मानता हूं।"


अभिनेता ने आगे बताया कि इस फिल्म का निर्देशन प्रकाश झा ने किया था। फिल्म में अजय देवगन, ग्रेसी सिंह, यशपाल शर्मा, मुकेश तिवारी, चेतन पंडित, मोहन जोशी, अयूब खान, अखिलेंद्र मिश्रा और मोहन अगासे जैसे बेहतरीन कलाकारों के साथ काम करने का अनुभव बहुत यादगार रहा।


फिल्म 'गंगाजल' में अनूप सोनी ने पुलिस इंस्पेक्टर नीलकंठ तिवारी का किरदार निभाया था, जो एक कर्तव्यनिष्ठ और ईमानदार पुलिस अधिकारी थे।


यह क्राइम-एक्शन फिल्म 1980 के दशक के प्रसिद्ध 'भागलपुर आंखफोड़वा कांड' से प्रेरित थी, जिसमें पुलिस ने अपराधियों की आंखों में तेजाब डाल दिया था।


इस फिल्म में अजय देवगन को उनके बेहतरीन अभिनय के लिए 'राष्ट्रीय पुरस्कार' से सम्मानित किया गया था। बिहार में रिलीज के समय इस फिल्म को लेकर काफी विवाद हुआ था और राजनीतिक विरोध के कारण इसकी स्क्रीनिंग एक हफ्ते तक रोकनी पड़ी थी।