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क्या आप जानते हैं ऑस्कर ट्रॉफी की असली कहानी? जानें इसके पीछे के राज़!

98वें एकेडमी अवॉर्ड्स में लियोनार्डो डिकैप्रियो की फिल्म *वन बैटल आफ्टर अनदर* ने 'बेस्ट पिक्चर' का खिताब जीता। जानें ऑस्कर ट्रॉफी का असली नाम, इसके पीछे की कहानी और क्या इसे बेचा जा सकता है। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि कैसे इस ट्रॉफी को 'ऑस्कर' नाम मिला और इसके बिक्री के नियम क्या हैं। क्या आप जानते हैं कि माइकल जैक्सन ने एक ऑस्कर ट्रॉफी कितने में खरीदी थी? जानने के लिए पढ़ें पूरा लेख!
 

ऑस्कर अवॉर्ड्स का जादू


98वें एकेडमी अवॉर्ड्स समारोह लॉस एंजेलेस के डॉल्बी थिएटर में आयोजित किया गया है। विजेताओं की घोषणा पहले ही की जा चुकी है। लियोनार्डो डिकैप्रियो की फिल्म *वन बैटल आफ्टर अनदर* को 'बेस्ट पिक्चर' का खिताब मिला है और इसने कुल छह पुरस्कार जीते हैं। इस प्रतिष्ठित ट्रॉफी की अपनी एक दिलचस्प कहानी है। आमतौर पर इसे "ऑस्कर ट्रॉफी" कहा जाता है, लेकिन इसका आधिकारिक नाम "एकेडमी अवॉर्ड ऑफ़ मेरिट" है। यह ट्रॉफी 13.5 इंच लंबी और 3.8 किलोग्राम वजनी है, जो कांस्य से बनी है और सोने की परत से ढकी हुई है। ऑस्कर ट्रॉफी के इतिहास में एक समय ऐसा भी आया जब इसे नीलामी में बेचा गया था, जिसे माइकल जैक्सन ने खरीदा था। अब सवाल यह है कि क्या आज भी इस ट्रॉफी को बेचा जा सकता है, और अतीत में किन मौकों पर ये ट्रॉफियाँ बेची गई हैं?


ऑस्कर नाम की उत्पत्ति

इसे "ऑस्कर" नाम कैसे मिला?


हालांकि इसका आधिकारिक नाम "एकेडमी अवॉर्ड ऑफ़ मेरिट" है, लेकिन यह ट्रॉफी "ऑस्कर" के नाम से अधिक प्रसिद्ध है। इस नाम की उत्पत्ति के पीछे एक दिलचस्प कहानी है। एकेडमी की लाइब्रेरियन मार्गरेट हेरिक ने जब पहली बार इस ट्रॉफी को देखा, तो उन्होंने कहा कि यह उनके अंकल ऑस्कर जैसी दिखती है।


एकेडमी ने 1939 तक इस नाम को आधिकारिक रूप से नहीं अपनाया, लेकिन 1934 तक यह नाम इतना प्रचलित हो चुका था कि हॉलीवुड के कॉलमनिस्ट सिडनी स्कोल्स्की ने कैथरीन हेपबर्न के पहले 'बेस्ट एक्ट्रेस' अवॉर्ड जीतने पर इस नाम का उल्लेख किया था। संयोग से, मार्गरेट हेरिक बाद में एकेडमी की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर बन गईं। इस प्रकार, इस अवॉर्ड को "ऑस्कर अवॉर्ड" के नाम से जाना जाने लगा।


क्या ऑस्कर ट्रॉफी बेची जा सकती है?

क्या इस ट्रॉफी को बेचा जा सकता है?


इस ट्रॉफी की बिक्री पर कुछ कड़े नियम लागू हैं। एकेडमी ऑफ़ मोशन पिक्चर आर्ट्स एंड साइंसेज़ के अनुसार, यदि कोई विजेता अपनी ऑस्कर ट्रॉफी बेचना चाहता है, तो उसे सीधे नीलाम नहीं कर सकता। ट्रॉफी की बिक्री पर पूरी तरह से रोक है। हालांकि, यदि कोई विजेता ऐसा करना चाहता है, तो उसे अपनी ट्रॉफी एकेडमी को केवल $1 की मामूली कीमत पर वापस बेचने का प्रस्ताव देना होगा। यह नियम 1951 में लागू हुआ था, लेकिन यह उस तारीख से पहले दी गई ट्रॉफियों पर लागू नहीं होता है।


ऑस्कर ट्रॉफी की बिक्री का इतिहास

किसने ऑस्कर ट्रॉफी बेची है?


यह नियम 1951 से पहले दिए गए ऑस्कर पुरस्कारों पर लागू नहीं होता है। इसलिए, कुछ ट्रॉफियाँ बड़ी रकम में बेची गई हैं। उदाहरण के लिए, माइकल जैक्सन ने फिल्म *गॉन विद द विंड* (1940) के लिए दिए गए 'सर्वश्रेष्ठ फिल्म' ऑस्कर को लगभग $1.5 मिलियन में खरीदा था। यह ट्रॉफी मूल रूप से फिल्म के निर्माता, डेविड ओ. सेल्ज़निक को दी गई थी। उस समय, यह किसी नीलामी में बेची गई सबसे महंगी ऑस्कर ट्रॉफी थी।


इसके अलावा, फिल्म *सिटिजन केन* (1942) के लिए दिया गया पुरस्कार बाद में $861,542 में बेचा गया था। कई अन्य पुरानी ऑस्कर ट्रॉफियाँ भी विभिन्न नीलामियों के माध्यम से बेची गई हैं। 1940 और 1950 के दशक के कुछ विजेताओं की ट्रॉफियाँ एक हाथ से दूसरे हाथ में गईं, क्योंकि कुछ कलाकारों या उनके परिवारों ने बाद में उन्हें नीलाम करने का निर्णय लिया। हालांकि, भविष्य में ऐसी नीलामियों को रोकने के लिए एक नया नियम लागू किया गया।