×

क्या आप जानते हैं SP Balasubrahmanyam की अनोखी रिकॉर्डिंग की कहानी?

इस लेख में हम महान गायक SP बालासुब्रमण्यम की अद्वितीय यात्रा पर चर्चा करेंगे, जिन्होंने एक दिन में 21 गाने रिकॉर्ड कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। जानें उनके जीवन की महत्वपूर्ण घटनाएँ, जैसे कि कैसे उन्होंने बिना औपचारिक संगीत शिक्षा के भी भारतीय संगीत जगत में अपनी पहचान बनाई। उनके योगदान और उपलब्धियों के बारे में जानकर आप भी उनकी प्रतिभा के कायल हो जाएंगे।
 

महान गायक SP बालासुब्रमण्यम का अद्वितीय सफर




नई दिल्ली, 3 जून। सोचिए, एक गायक जब सुबह रिकॉर्डिंग स्टूडियो में कदम रखता है और रात को बाहर निकलते समय उसके नाम पर 21 गाने रिकॉर्ड हो चुके होते हैं। यह कोई काल्पनिक कथा नहीं है, बल्कि 8 फरवरी 1981 को बेंगलुरु में महान गायक श्रीपति पंडिताराध्युला बालासुब्रमण्यम (एसपीबी या बालु) द्वारा रची गई एक ऐतिहासिक घटना है। उन्होंने संगीतकार उपेंद्र कुमार के लिए कन्नड़ गीतों की रिकॉर्डिंग के दौरान एक दिन में 19 तमिल और 16 हिंदी गाने रिकॉर्ड करने का अद्वितीय रिकॉर्ड बनाया।


बालासुब्रमण्यम का जन्म 4 जून 1946 को नेल्लोर (आंध्र प्रदेश) के एक तेलुगु ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके पिता, एस. पी. सांबामूर्ति, एक 'हरिकथा' कलाकार थे। पिता की इच्छा थी कि बालु इंजीनियर बने, इसलिए उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू की, लेकिन टाइफाइड के कारण पढ़ाई छोड़कर मद्रास (चेन्नई) चले गए।


1969 में, जब तमिल सिनेमा के दिग्गज एम. जी. रामचंद्रन (एमजीआर) अपनी फिल्म 'अदिमै पेन' के गाने 'आयिरम निलावे वा' की रिकॉर्डिंग के लिए एस. पी. बालासुब्रमण्यम का इंतजार कर रहे थे, तब बालासुब्रमण्यम अचानक बीमार पड़ गए। एमजीआर ने उनकी तबियत ठीक होने तक फिल्म की रिकॉर्डिंग रोक दी, जो उनकी प्रतिभा का प्रमाण है।


15 दिसंबर 1966 को तेलुगु फिल्म 'श्री श्री श्री मर्यादा रमन्ना' के गीत 'एमिये विंत मोहम' से अपने करियर की शुरुआत करने वाले एस. पी. बालासुब्रमण्यम ने कभी भी औपचारिक संगीत शिक्षा नहीं ली। फिर भी, 1980 में निर्देशक के. विश्वनाथ ने उन्हें 'शंकराभरणम' फिल्म के गीत गाने का मौका दिया, जिसमें उन्होंने अपनी प्रतिभा साबित की और सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायक का 'राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार' जीता।


1981 में, एस. पी. बालासुब्रमण्यम ने के. बालचंदर की फिल्म 'एक दूजे के लिए' से हिंदी सिनेमा में कदम रखा, और इस फिल्म के गाने 'तेरे मेरे बीच में, कैसा है ये बंधन अंजाना' ने उन्हें दूसरा राष्ट्रीय पुरस्कार दिलाया।


इसके बाद, वे बॉलीवुड के सुपरस्टार सलमान खान की आवाज बन गए। 'मैंने प्यार किया' (1989) का 'दिल दीवाना' हो या 'हम आपके हैं कौन…' (1994) में लता मंगेशकर के साथ गाया गया 'दीदी तेरा देवर दीवाना', उनकी आवाज ने हर दिल को छू लिया।


डबिंग की दुनिया में, उन्होंने कमल हासन के तेलुगु किरदारों को जीवंत किया। फिल्म 'दशावतारम' (2008) में कमल हासन के 10 किरदारों में से 7 को उनकी आवाज ने जीवंत किया। इसके अलावा, उन्होंने हॉलीवुड अभिनेता बेन किंग्सले के लिए फिल्म 'गांधी' के तेलुगु संस्करण में भी डबिंग की।


भारत सरकार ने उनके अद्वितीय योगदान के लिए उन्हें 2001 में पद्मश्री, 2011 में पद्म भूषण और 2021 में मरणोपरांत पद्म विभूषण से सम्मानित किया। आंध्र प्रदेश सरकार ने उन्हें 25 बार नंदी पुरस्कारों से नवाजा।


5 सितंबर 2020 को चेन्नई के एमजीएम अस्पताल में एस. पी. बालासुब्रमण्यम का निधन हो गया। उनकी विरासत को सम्मानित करते हुए, 15 दिसंबर 2025 को हैदराबाद के रवींद्र भारती में उनकी कांस्य प्रतिमा का अनावरण किया गया।