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क्या Netflix की फिल्म 'घूसखोर पंडित' धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचा रही है? जानें पूरी कहानी!

नेटफ्लिक्स की आगामी फिल्म 'घूसखोर पंडित' के शीर्षक ने विवाद खड़ा कर दिया है। वकील विनीत जिंदल ने दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है, जिसमें फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि यह शीर्षक ब्राह्मण समुदाय की गरिमा को ठेस पहुंचाता है। जिंदल का आरोप है कि 'पंडित' शब्द को भ्रष्टाचार से जोड़कर पेश किया जा रहा है, जो धार्मिक भावनाओं को आहत करता है। इस मामले में अदालत से तात्कालिक हस्तक्षेप की मांग की गई है।
 

फिल्म 'घूसखोर पंडित' पर विवाद गहराया


नई दिल्ली, 4 फरवरी। नेटफ्लिक्स की नई फिल्म 'घूसखोर पंडित' के शीर्षक को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। इस संबंध में वकील विनीत जिंदल ने दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की है, जिसमें फिल्म की रिलीज पर तुरंत रोक लगाने की मांग की गई है।


याचिका में यह आरोप लगाया गया है कि 'घूसखोर पंडित' शीर्षक ब्राह्मण समुदाय की गरिमा और भावनाओं को ठेस पहुंचाता है और इसे जानबूझकर अपमानजनक तरीके से प्रस्तुत किया गया है।


याचिकाकर्ता विनीत जिंदल ने कहा कि नेटफ्लिक्स ने इस फिल्म का प्रचार शुरू कर दिया है, जिसमें 'पंडित' शब्द को भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी से जोड़ा जा रहा है, जो ब्राह्मण समुदाय के लिए अपमानजनक और सांप्रदायिक रूप से उत्तेजक है।


जिंदल ने एक जागरूक नागरिक और आचार्य के रूप में इस कंटेंट पर गंभीर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि फिल्म की रिलीज से ब्राह्मण समुदाय की छवि को गंभीर नुकसान होगा और सामाजिक सद्भाव बिगड़ सकता है। याचिका में यह भी कहा गया है कि नेटफ्लिक्स और संबंधित नियामक संस्थाओं ने इस मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।


इसलिए, उन्होंने भारत के संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत दिल्ली उच्च न्यायालय से तत्काल हस्तक्षेप और अंतरिम रोक की मांग की है।


याचिका में अनुरोध किया गया है कि इसे तात्कालिक मानते हुए 6 फरवरी को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए। इसमें यह भी उल्लेख किया गया है कि 'पंडित' शब्द हिंदू धर्म में विद्वान, पुजारी और आध्यात्मिक गुरु के लिए सम्मानजनक है। इसे भ्रष्टाचार से जोड़ना धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है।


याचिकाकर्ता ने अदालत से अपील की है कि फिल्म या शो की रिलीज से पहले इस मामले की गंभीरता को देखते हुए रोक लगाई जाए, ताकि सार्वजनिक व्यवस्था और सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखा जा सके।


नेटफ्लिक्स की ओर से इस याचिका पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। यह मामला सोशल मीडिया पर भी तेजी से फैल रहा है, जहां इसे धार्मिक भावनाओं के अपमान के रूप में देखा जा रहा है।