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कौन हैं रवि शंकर शर्मा? जानें इस महान संगीतकार की प्रेरणादायक कहानी

रवि शंकर शर्मा, जिन्हें संगीत की दुनिया में 'रवि' के नाम से जाना जाता है, ने अपने संघर्ष और मेहनत से हिंदी सिनेमा में एक महत्वपूर्ण स्थान बनाया। बिना औपचारिक शिक्षा के, उन्होंने अपने पिता के भजनों से संगीत की बुनियाद रखी और कई प्रसिद्ध फिल्मों में संगीत दिया। जानें उनके जीवन की प्रेरणादायक कहानी और संगीत में उनके योगदान के बारे में।
 

रवि शंकर शर्मा: संघर्ष से सफलता की ओर


मुंबई, 6 मार्च। नाम और प्रसिद्धि हासिल करना जीवन में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। संगीत की दुनिया में कई ऐसे कलाकार हैं, जिन्होंने कठिनाइयों और मेहनत के बल पर सफलता की ऊंचाइयों को छुआ। इनमें से एक हैं रवि शंकर शर्मा, जिन्हें संगीत की दुनिया में बस 'रवि' के नाम से जाना जाता है।


रवि ने कभी औपचारिक संगीत शिक्षा नहीं ली, लेकिन अपने पिता के भजनों से संगीत की बुनियादी समझ विकसित की। उन्होंने बचपन में ही हारमोनियम बजाना सीख लिया और कई अन्य वाद्ययंत्रों में भी महारत हासिल की। हालांकि, परिवार की आर्थिक स्थिति के कारण उन्हें दिल्ली में इलेक्ट्रीशियन का काम करना पड़ा, लेकिन उनका दिल हमेशा संगीत में लगा रहा।


रवि का जीवन संघर्षों से भरा था, लेकिन उनकी मेहनत ने उन्हें हिंदी सिनेमा के प्रमुख संगीतकारों में स्थान दिलाया। 3 मार्च 1926 को दिल्ली में जन्मे रवि का सपना था कि वे प्लेबैक सिंगर बनें और फिल्म संगीत में नाम कमाएं। 1950 में, वे अपने सपनों के साथ मुंबई पहुंचे। शुरुआत में उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, जैसे कि बिना ठिकाने के रहना और रातें रेलवे स्टेशन पर बिताना। लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी।


1952 में उनकी किस्मत ने पलटी मारी जब उनकी मुलाकात संगीतकार हेमंत कुमार से हुई। उन्हें फिल्म 'आनंद मठ' में 'वंदे मातरम' के कोरस गाने का मौका मिला, जिससे उनकी संगीतकार के रूप में यात्रा शुरू हुई।


1955 में, उन्होंने पहली बार फिल्म 'अलबेली' में संगीत निर्देशन किया। इसके बाद उन्होंने कई प्रसिद्ध फिल्मों में संगीत दिया, जैसे 'वचन', 'दिल्ली का ठग', 'चौदहवीं का चांद' और 'घराना'।


रवि की एक खासियत थी कि वे पहले गीत लिखवाते थे और फिर उसे संगीतबद्ध करते थे, जिससे उनके गाने बेहद कर्णप्रिय बनते थे। उन्हें 1961 में 'घराना' और 1965 में 'खानदान' के लिए फिल्मफेयर अवार्ड मिले।


महेंद्र कपूर के कई हिट गाने भी रवि ने ही दिए। उन्होंने 50 से अधिक हिंदी फिल्मों में संगीत दिया। 1970 से 1982 तक उन्होंने फिल्म संगीत से ब्रेक लिया, लेकिन 1982 में बी.आर. चोपड़ा की 'निकाह' से शानदार वापसी की। इसके बाद 1984 से 2005 तक उन्होंने मलयालम फिल्मों में 'बॉम्बे रवि' के नाम से संगीत दिया।


7 मार्च 2012 को मुंबई में उनका निधन हो गया।