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कौन थीं तीजन बाई? पंडवानी गायिका का निधन और उनकी कला का योगदान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने प्रसिद्ध पंडवानी गायिका तीजन बाई के निधन पर शोक व्यक्त किया है। तीजन बाई ने छत्तीसगढ़ की लोक कला को वैश्विक पहचान दिलाई और उनके योगदान को देखते हुए उन्हें कई राष्ट्रीय पुरस्कार मिले। जानें उनके जीवन और कला के बारे में।
 

तीजन बाई का निधन: कला जगत को हुआ बड़ा नुकसान


नई दिल्ली, 5 जुलाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रसिद्ध पंडवानी गायिका तीजन बाई के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि उनका निधन कला और संस्कृति के क्षेत्र में एक अपूरणीय क्षति है।


रविवार सुबह, पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका तीजन बाई के निधन से मुझे अत्यंत दुख हुआ है। उन्होंने छत्तीसगढ़ की इस लोक कला को अपनी अद्वितीय प्रस्तुति से वैश्विक पहचान दिलाई। उनका जाना कला और संस्कृति के लिए एक बड़ा नुकसान है। इस दुख की घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिवार और प्रशंसकों के साथ हैं। ओम शांति।"


रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी तीजन बाई के निधन पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा, "लोक कलाओं में अपनी गायकी से अमिट छाप छोड़ने वाली पंडवानी गायिका तीजन बाई के निधन से मुझे गहरी वेदना हुई है। उन्होंने छत्तीसगढ़ की कला को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका जाना संगीत जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। इस दुख की घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिवार और प्रशंसकों के साथ हैं। ओम शांति।"


सूत्रों के अनुसार, तीजन बाई कुछ समय से बीमार थीं और उन्होंने 70 वर्ष की आयु में रायपुर एम्स में अंतिम सांस ली।


तीजन बाई का जन्म 1956 में छत्तीसगढ़ के भिलाई के निकट गनियारी गांव में हुआ था। उन्होंने पंडवानी, जो महाभारत की कहानियों को गायन और अभिनय के माध्यम से प्रस्तुत करने वाली एक लोक कला है, को नई पहचान दी।


उनके योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें 1988 में पद्मश्री, 2003 में पद्म भूषण और 2019 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया। इसके अलावा, उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार सहित कई अन्य प्रतिष्ठित पुरस्कार भी मिले।