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कैसे बने दानिश इकबाल 'धुरंधर: द रिवेंज' के बड़े साहब? जानें उनकी अनोखी कहानी!

फिल्म 'धुरंधर: द रिवेंज' ने बॉक्स ऑफिस पर 1,600 करोड़ रुपये की कमाई की है। दानिश इकबाल ने दाऊद का किरदार निभाकर रातों-रात प्रसिद्धि हासिल की। जानें कैसे उन्हें यह किरदार मिला और उनके मेकअप की थकाने वाली प्रक्रिया के बारे में। इस लेख में दानिश की कहानी और फिल्म की सफलता के पीछे के राज़ का खुलासा किया गया है।
 

फिल्म 'धुरंधर: द रिवेंज' की सफलता




मुंबई, 6 अप्रैल। आदित्य धर की फिल्म 'धुरंधर: द रिवेंज' ने बॉक्स ऑफिस पर कमाई के नए रिकॉर्ड स्थापित किए हैं। यह फिल्म वैश्विक स्तर पर 1,600 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई कर चुकी है।


फिल्म में कुछ ऐसे किरदार हैं, जिनका स्क्रीन टाइम कम है, लेकिन उनकी चर्चा जोरों पर है। इनमें से एक हैं दानिश इकबाल, जिन्होंने दाऊद का किरदार निभाया है। इस भूमिका ने उन्हें रातों-रात प्रसिद्धि दिलाई। लेकिन क्या आप जानते हैं कि उन्हें यह किरदार कैसे मिला?


दानिश इकबाल अब 'धुरंधर: द रिवेंज' में बड़े साहब के किरदार के लिए चर्चा का विषय बन चुके हैं। उनकी अदाकारी की सराहना हो रही है, लेकिन जिस तरह से उन्हें इस किरदार के लिए चुना गया, वह काफी दिलचस्प है। अभिनेता ने इस बारे में अपने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो साझा किया।


उन्होंने बताया कि उन्हें पहले एक मैसेज मिला जिसमें उनकी हाइट और वेट पूछी गई। शुरुआत में उन्हें लगा कि शायद कास्टिंग हो रही है। जब उन्होंने जानकारी दी, तो उन्हें बताया गया कि यह किरदार की आवश्यकता है। इसके बाद कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा का फोन आया, जिसमें दाऊद के किरदार के बारे में बताया गया। उस समय उन्होंने पूरा नाम नहीं बताया, जिससे उन्हें लगा कि यह किसी किरदार का नाम है।


निर्माताओं ने फिल्म की रिलीज से पहले सस्पेंस बनाए रखने की पूरी कोशिश की, क्योंकि छोटे-छोटे किरदार फिल्म में जान डालते हैं। इससे पहले, दानिश ने एक इंटरव्यू में बताया था कि बड़े साहब के किरदार के लिए उन्हें कई घंटों तक मेकअप करवाना पड़ता था।


उन्होंने कहा, "अगर मेरी शिफ्ट सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक होती, तो मैं सुबह 3 बजे तक सेट पर होता। मुझ पर पांच से छह लोग काम करते थे और इसमें लगभग नौ घंटे लग जाते थे। प्रोस्थेटिक लगाने की प्रक्रिया थकाने वाली थी और इसमें कई पाबंदियाँ थीं। सांस लेने में दिक्कत होती थी। प्रक्रिया पूरी होने के बाद कुछ खा-पी नहीं सकते थे। मैं पूरे दिन केवल तरल पदार्थों पर निर्भर रहता था। कभी-कभी थोड़ी सी डार्क चॉकलेट खा लेता था।"