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आदिल हुसैन ने राजनीतिक जिम्मेदारी पर दिया बड़ा बयान, समाज की भूमिका पर की चर्चा

आदिल हुसैन ने अपनी नई फिल्म के प्रमोशन के दौरान देश के राजनीतिक माहौल पर विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि केवल नेताओं को दोष देना उचित नहीं है, बल्कि समाज के हर सदस्य को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। उन्होंने कलाकारों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया और कहा कि हमें अगली पीढ़ियों के लिए एक बेहतर समाज छोड़ने पर ध्यान देना चाहिए। जानें उनके विचार और दिल्ली में चल रहे प्रदर्शनों के बारे में।
 

आदिल हुसैन का समाज और राजनीति पर विचार




मुंबई, 23 जुलाई। अभिनेता आदिल हुसैन, जो अपनी नई फिल्म 'मैक्स, मिन और म्याउजाकी' के प्रचार में व्यस्त हैं, ने देश के वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य पर अपनी स्पष्ट राय साझा की। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात के लिए केवल नेताओं को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है, बल्कि समाज के हर सदस्य को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए।


आदिल ने एक बातचीत में कहा कि राजनीति और समाज को अलग नहीं किया जा सकता। राजनेता हमारे समाज का हिस्सा हैं, और इसलिए केवल उन्हें दोष देना सही नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि नेताओं को जनता से वोट मांगने के बाद अधिक जवाबदेह होना चाहिए, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि अन्य लोग अपनी जिम्मेदारी से मुक्त हो जाएं।


उन्होंने आगे कहा, "कलाकारों और फिल्म निर्माताओं की भूमिका समाज को दिशा देने में महत्वपूर्ण होती है। फिल्में और अन्य माध्यम लाखों लोगों को प्रभावित करते हैं, इसलिए मनोरंजन उद्योग के लोगों को यह समझना चाहिए कि उनके कार्यों का समाज पर गहरा प्रभाव पड़ता है।"


आदिल ने यह भी कहा कि जिनके पास शक्ति और संसाधन हैं, उन्हें आत्ममंथन करने की आवश्यकता है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि हम अगली पीढ़ियों के लिए किस तरह का समाज छोड़कर जा रहे हैं। केवल आर्थिक विकास से सब कुछ ठीक नहीं होगा, अगर अगली पीढ़ी मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रही है।


उन्होंने कहा, "आज के समय में लोगों को अपने परिवार और समाज के भविष्य के बारे में गंभीरता से सोचना चाहिए। आत्मचिंतन के बिना संतुलित विकास संभव नहीं है।"


आदिल ने नेताओं की शिक्षा और वैश्विक समझ पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि जो लोग देश का नेतृत्व करते हैं, उनका शिक्षित और जागरूक होना आवश्यक है ताकि वे सही दिशा में निर्णय ले सकें।


दिल्ली में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं, जिसका असर अन्य शहरों जैसे मुंबई और कोलकाता में भी देखा जा रहा है। प्रदर्शन तब बढ़ गए जब दिल्ली पुलिस ने सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाकर अस्पताल में भर्ती कराया। वांगचुक 21 दिनों से भूख हड़ताल पर थे।


सोनम वांगचुक प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं और पेपर लीक के मुद्दे पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।