हवाई जहाज के पीछे सफेद लकीरें: क्या हैं ये और क्यों बनती हैं?
हवाई जहाज की सफेद लकीरों का रहस्य
Hawai Jahaj Ke Piche Safed Line Kyon Banti Hai
Hawai Jahaj Ke Piche Safed Line Kyon Banti Haiहवाई जहाज की जानकारी: जब आप आसमान में उड़ते हवाई जहाज को देखते हैं, तो उसके पीछे एक लंबी सफेद लकीर बनती हुई दिखाई देती है। यह लकीर कभी जल्दी गायब हो जाती है, तो कभी कई किलोमीटर तक फैली रहती है। कभी-कभी यह इतनी देर तक रहती है कि बादल जैसी दिखने लगती है। लोग इसे विमान का धुआँ समझते हैं, लेकिन यह वास्तव में एक प्राकृतिक प्रक्रिया का परिणाम है। इसे कंट्रेल (Contrail) कहा जाता है, जिसका पूरा नाम कंडेन्सेशन ट्रेल है।
सफेद लकीरें कैसे बनती हैं?
हवाई जहाज के इंजन में ईंधन जलने से ऊर्जा उत्पन्न होती है, जिससे कार्बन डाइऑक्साइड और जलवाष्प जैसी गैसें निकलती हैं। जब विमान ऊँचाई पर उड़ता है, तो उसके चारों ओर का वातावरण बहुत ठंडा होता है। आमतौर पर 8 से 12 किलोमीटर की ऊँचाई पर तापमान शून्य से कई डिग्री नीचे होता है।
जब इंजन से निकली गर्म जलवाष्प ठंडी हवा में मिलती है, तो यह तेजी से ठंडी होकर पानी की छोटी बूंदों में बदल जाती है। ये बूंदें जमकर बर्फ के छोटे क्रिस्टल बना लेती हैं। लाखों ऐसे क्रिस्टल मिलकर हमें सफेद लकीर के रूप में दिखाई देते हैं। इसलिए, कंट्रेल वास्तव में धुएँ की लकीर नहीं, बल्कि हवा में मौजूद बर्फ के सूक्ष्म क्रिस्टलों का समूह होती है।
हर विमान के पीछे सफेद लकीर क्यों नहीं बनती?
कंट्रेल बनने के लिए केवल विमान का उड़ना ही पर्याप्त नहीं है। इसके लिए आसपास का तापमान और नमी भी अनुकूल होनी चाहिए। यदि विमान ऐसी ऊँचाई पर उड़ रहा है जहाँ हवा ठंडी और नम है, तो सफेद लकीर बन सकती है।
हालांकि, अगर हवा ठंडी है लेकिन उसमें नमी कम है, तो जलकण जल्दी वाष्प में बदल जाते हैं। ऐसी स्थिति में सफेद लकीर नहीं बनती या जल्दी गायब हो जाती है। यही कारण है कि एक ही समय में उड़ रहे दो विमानों में से एक के पीछे सफेद लकीर हो सकती है, जबकि दूसरे के पीछे कुछ नहीं दिखाई देता।
कंट्रेल की स्थायित्व और मौसम पर प्रभाव
कंट्रेल कितनी देर तक दिखाई देगी, यह मुख्य रूप से हवा में मौजूद नमी पर निर्भर करता है। यदि हवा शुष्क है, तो बर्फ के क्रिस्टल जल्दी वाष्प में बदल जाते हैं। इस प्रक्रिया को सब्लिमेशन कहा जाता है।
इसके विपरीत, यदि हवा नम है, तो क्रिस्टल धीरे-धीरे बड़े हो सकते हैं और लंबे समय तक बने रह सकते हैं। इस तरह, कंट्रेल लंबे समय तक बनी रह सकती है और बाद में पतले बादलों जैसी दिखने लगती है।
क्या कंट्रेल मौसम को प्रभावित करती हैं?
लंबे समय तक बनी रहने वाली कंट्रेल मौसम और पृथ्वी के तापमान को प्रभावित कर सकती हैं। जब ये फैलकर बड़े क्षेत्र में पतले बादलों जैसी परत बना लेती हैं, तो इन्हें कंट्रेल सिरस कहा जाता है। ये बादलों की तरह सूर्य की कुछ रोशनी को वापस अंतरिक्ष में परावर्तित कर सकती हैं, लेकिन साथ ही पृथ्वी की सतह से निकलने वाली ऊष्मा को भी रोक सकती हैं।
रात के समय इनका प्रभाव मुख्य रूप से पृथ्वी से निकलने वाली ऊष्मा को रोकने के रूप में होता है। दिन में दोनों प्रभाव एक साथ काम करते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, विमानन से बनने वाले इन कृत्रिम बर्फीले बादलों का कुल प्रभाव पृथ्वी को गर्म करने की दिशा में होता है।
क्या कंट्रेल विमान के लिए खतरनाक होती हैं?
सामान्य परिस्थितियों में, कंट्रेल विमान के लिए किसी खतरे का संकेत नहीं होती। यह इंजन से निकली जलवाष्प और ठंडी हवा के मिलने से बनने वाली सामान्य भौतिक प्रक्रिया है। सफेद लकीर का दिखाई देना इस बात का संकेत नहीं है कि विमान के इंजन में कोई खराबी है।
हालांकि, विमान के इंजन से निकलने वाली गैसों में कार्बन डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड होते हैं, जिनका पर्यावरण पर प्रभाव पड़ता है। इसलिए, विमानन का पर्यावरणीय प्रभाव केवल कंट्रेल तक सीमित नहीं है।
क्या कंट्रेल जानबूझकर बनाई जाती हैं?
आमतौर पर ऐसा नहीं होता। सामान्य उड़ानों में पायलट कंट्रेल बनाने के लिए कोई विशेष प्रक्रिया नहीं अपनाते। यह विमान की उड़ान के दौरान वातावरण की परिस्थितियों के कारण अपने आप बनती है।
कभी-कभी यह दावा किया जाता है कि विमान जानबूझकर आसमान में रासायनिक पदार्थों का छिड़काव करते हैं। लेकिन सामान्य हवाई जहाजों के पीछे बनने वाली सफेद लकीरों का वैज्ञानिक कारण जलवाष्प का ठंडा होकर बर्फ के क्रिस्टलों में बदलना है।
निष्कर्ष
हवाई जहाज के पीछे बनने वाली सफेद लकीरें एक सामान्य वैज्ञानिक प्रक्रिया हैं। इनका बनना विमान के इंजन से निकलने वाली जलवाष्प और ऊँचाई पर मौजूद तापमान और नमी पर निर्भर करता है। अगली बार जब आप आसमान में किसी विमान के पीछे सफेद लकीर देखें, तो याद रखें कि आप वास्तव में हवा में बनते छोटे-छोटे बर्फ के क्रिस्टलों को देख रहे हैं।