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रावण: एक खलनायक से अधिक, क्या है उसकी असली पहचान?

रावण, एक ऐसा पात्र जो भारतीय पौराणिक कथाओं में खलनायक के रूप में जाना जाता है, लेकिन क्या वह केवल एक खलनायक है? इस लेख में हम रावण की पहचान, उसकी पूजा और उसके बारे में रोचक तथ्यों पर चर्चा करेंगे। जानें कैसे रावण को विभिन्न ग्रंथों में प्रस्तुत किया गया है और उसकी उपस्थिति आज के समाज में कैसे बदल रही है। क्या रावण को प्रतिनायक के रूप में देखा जा सकता है? इस लेख में जानें रावण की कहानी की नई व्याख्या।
 

रावण का महत्व और उसकी पहचान

Ravan Facts in Hindi

Ravan Facts in Hindi

रावण के बारे में तथ्य: फिल्मों की सफलता अक्सर प्रभावशाली खलनायकों पर निर्भर करती है। एक मजबूत खलनायक फिल्म की कहानी को और भी दिलचस्प बना देता है। नायक और खलनायक के बीच का संबंध इतना गहरा होता है कि खलनायक नायकत्व को और मजबूत कर देता है।

कई बार खलनायक को नायक के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, जैसे राम और रावण के बीच का संबंध विभिन्न रामायणों में देखने को मिलता है। श्री राम का उल्लेख ऋग्वेद में मिलता है। वाल्मीकि रामायण के बाद, अध्यात्म रामायण भी एक प्राचीन ग्रंथ है, जिसे वाल्मीकि ने लिखा। विश्वभर में राम कथा पर 500 से अधिक ग्रंथ हैं। हर ग्रंथ में रावण को विद्वान और शिवभक्त के रूप में दर्शाया गया है, लेकिन उसका राक्षस होना उसके चरित्र पर भारी पड़ता है।

हालांकि, कुछ साहित्य में रावण की प्रशंसा भी की गई है। दस सिर वाले रावण के बारे में कहा जाता है कि 'दस' का अर्थ है बहुत। जैन धर्म के ग्रंथों में रावण को प्रतिनारायण माना गया है। रावण ने 'शिव तांडव स्त्रोत' की रचना की और 'रावण संहिता' जैसे ज्योतिष ग्रंथ भी लिखे। आचार्य चतुरसेन शास्त्री ने रावण को केंद्रीय पात्र मानते हुए 'वयम् रक्षामः' नामक उपन्यास लिखा।

मध्य प्रदेश के विदिशा में रावण को महात्मा के रूप में पूजा जाता है। यहां उसकी 8 फीट ऊंची पाषाण प्रतिमा है, जिसे दशहरे के दिन पूजा जाता है। नोएडा का विसरख रावण का पैतृक गांव माना जाता है। यहां रावण के पिता विश्रवा मुनि रहते थे। रावण का पुतला जलाने के दिन विसरख के लोग शोक मनाते हैं।

फादर कामिल बुल्के ने अपनी पुस्तक 'रामकथा' में लिखा है कि ब्रह्मा ने रावण को अमरत्व का वरदान दिया था। रावण को ब्रह्मास्त्र देकर कहा गया था कि वह तभी मरेगा जब उसका मर्म स्थान छेदित होगा। जटायु से युद्ध के दौरान रावण ने कहा कि उसका मर्म स्थान पैर का अंगूठा है। अध्यात्म रामायण में रावण के नाभि प्रदेश को अमृत माना गया है।

कानपुर के पास कैलाश मंदिर में विजया दशमी के दिन रावण की महाआरती होती है। 1865 में यहां छिन्न मस्तिका माता की मूर्ति स्थापित की गई थी। मध्य प्रदेश के मंदसौर में रावण को जमाई मानकर पूजा की जाती है। यहां रावण की 35 फीट ऊंची कंकरीट प्रतिमा है।

फतेहपुर के खजुहा में रावण के तांबे के सिर की पूजा होती है। लखनऊ में रावण का भव्य मंदिर है, जहां दशहरे के दिन विशेष पूजा होती है। जोधपुर में मंदोदरी के विवाह स्थल पर रावण की छतरी मौजूद है।

वर्तमान में राम-रावण की कथा की व्याख्याएं बदल गई हैं। आज के समाज में रावण की उपस्थिति को और अधिक गहरा किया जा रहा है। यह चिंता का विषय है कि कहीं रावण को खलनायक की जगह प्रतिनायक के रूप में प्रस्तुत न किया जाए। फिल्मों में खलनायक अंततः पराजित होता है, लेकिन अगर उसे प्रतिनायक बना दिया गया तो उसकी हार की संभावना समाप्त हो जाती है। रावण खलनायक था, प्रतिनायक नहीं।

(मूलरूप से दिनांक 16.10.2018 को प्रकाशित।)