नवरात्रि और दिवाली पर प्रॉपर्टी खरीदने के लिए जानें ये 7 महत्वपूर्ण टिप्स!
प्रॉपर्टी खरीदने के लिए महत्वपूर्ण बातें
Navratri-Diwali Property Buying Tips: 7 Things to Check Before Property Registration
Navratri-Diwali Property Buying Tips: 7 Things to Check Before Property Registrationनवरात्रि और दिवाली जैसे शुभ अवसरों पर कई लोग नए घर में प्रवेश करना पसंद करते हैं। इस समय बिल्डर ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए विशेष ऑफर और छूट प्रदान करते हैं। यदि आप इस नवरात्रि या दिवाली पर फ्लैट, घर या जमीन खरीदने की सोच रहे हैं, तो केवल कीमत और स्थान पर ध्यान न दें। यह सुनिश्चित करें कि प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री किसके नाम पर होगी, बिल्डर के पास जमीन का वैध मालिकाना हक है या नहीं, और फ्लैट का वास्तविक कारपेट एरिया क्या है। इन बातों की जांच करना बेहद आवश्यक है, क्योंकि यह आपको भविष्य में आर्थिक नुकसान और कानूनी विवादों से बचा सकता है। खासकर, यदि आप महिला के नाम पर या संयुक्त स्वामित्व में प्रॉपर्टी खरीदते हैं, तो कुछ राज्यों में स्टांप ड्यूटी में छूट भी मिल सकती है।
महिला के नाम पर प्रॉपर्टी खरीदने के फायदे
घर खरीदते समय परिवार अक्सर होम लोन और आय के आधार पर संपत्ति पति के नाम पर रजिस्टर करने का निर्णय लेते हैं। लेकिन रजिस्ट्री से पहले यह विचार करना चाहिए कि क्या संपत्ति पत्नी के नाम पर खरीदी जाए या दोनों को संयुक्त मालिक बनाया जाए। कई राज्यों में महिलाओं को संपत्ति की रजिस्ट्री पर पुरुषों की तुलना में कम स्टांप ड्यूटी चुकानी पड़ती है। उदाहरण के लिए, दिल्ली में महिलाओं के लिए स्टांप ड्यूटी 4 प्रतिशत है, जबकि पुरुषों के लिए यह 6 प्रतिशत है। हरियाणा में भी कुछ श्रेणियों में महिलाओं को कम दर का लाभ मिलता है। उत्तर प्रदेश में योग्य महिला खरीदारों को स्टांप ड्यूटी में छूट मिल सकती है। यदि 60 लाख रुपये की संपत्ति पर 1 प्रतिशत की छूट मिलती है, तो यह सीधे 60 हजार रुपये की बचत कर सकती है। इसके अलावा, महिला के नाम पर संपत्ति होने से कानूनी अधिकार भी मिलते हैं। इसलिए रजिस्ट्री से पहले स्वामित्व के इस निर्णय पर परिवार में स्पष्ट चर्चा होनी चाहिए।
RERA रजिस्ट्रेशन की जांच करें
त्योहारों के दौरान बिल्डर के आकर्षक ऑफर देखकर फ्लैट बुक करने से पहले उसका RERA रजिस्ट्रेशन अवश्य जांचें। रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट, 2016 के तहत निर्धारित शर्तों को पूरा करने वाली परियोजनाओं का संबंधित राज्य के RERA प्राधिकरण में पंजीकरण अनिवार्य है। आमतौर पर 500 वर्ग मीटर से अधिक जमीन पर विकसित होने वाली या आठ से अधिक अपार्टमेंट वाली परियोजनाएं इसके दायरे में आती हैं। खरीदार संबंधित राज्य के RERA पोर्टल पर जाकर प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन नंबर, बिल्डर का विवरण, निर्माण की स्थिति और पजेशन की प्रस्तावित तारीख की जांच कर सकते हैं। ध्यान रखें कि RERA रजिस्ट्रेशन का मतलब यह नहीं है कि संपत्ति के सभी कानूनी दस्तावेजों की जांच पूरी हो गई है।
Carpet Area और Super Built-up Area का अंतर
फ्लैट खरीदते समय विज्ञापन में दिए गए क्षेत्रफल को देखकर तुरंत निर्णय न लें। बिल्डर कई बार सुपर बिल्ट-अप एरिया के आधार पर फ्लैट का आकार बताता है, जबकि कारपेट एरिया वह क्षेत्र है जिसका उपयोग घर के भीतर किया जा सकता है। सुपर बिल्ट-अप एरिया में साझा सुविधाओं का आनुपातिक हिस्सा भी शामिल हो सकता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी फ्लैट का विज्ञापित क्षेत्रफल 1,200 वर्ग फीट है, तो उसका वास्तविक कारपेट एरिया इससे कम हो सकता है। इसलिए, बिल्डर से लिखित में कारपेट एरिया पूछें और प्रति वर्ग फीट कीमत की तुलना उसी आधार पर करें। इससे आपको यह समझने में मदद मिलेगी कि त्योहारों पर मिलने वाला डिस्काउंट वास्तव में फायदेमंद है या नहीं।
बिल्डर एग्रीमेंट को ध्यान से पढ़ें
प्रॉपर्टी बुक करते समय जल्दबाजी में एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर करना महंगा पड़ सकता है। दस्तावेज में पजेशन की तारीख, भुगतान की शर्तें, देरी होने पर ब्याज या मुआवजे, पार्किंग, रखरखाव शुल्क और फ्लैट में मिलने वाली सुविधाओं का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए। फ्लोरिंग, बिजली के पॉइंट, दरवाजे, खिड़कियां और सैनिटरी फिटिंग जैसी चीजों की जानकारी भी लिखित रूप में होनी चाहिए। यदि बिल्डर ने किसी विशेष सुविधा का वादा किया है, तो उसे एग्रीमेंट में शामिल कराएं। केवल मौखिक आश्वासन के आधार पर बड़ी रकम देना जोखिम भरा हो सकता है।
जमीन के मालिकाना हक की जांच
RERA रजिस्ट्रेशन के साथ-साथ जमीन के टाइटल यानी मालिकाना हक की स्वतंत्र जांच कराना भी आवश्यक है। यह जानना जरूरी है कि जमीन का वैध मालिक कौन है, उस पर कोई मुकदमा या बंधक तो नहीं है और निर्माण के लिए आवश्यक मंजूरियां प्राप्त हैं या नहीं। इसके लिए पुराने संपत्ति दस्तावेजों, संबंधित राजस्व रिकॉर्ड और स्वीकृत नक्शे की जांच कराना आवश्यक है। किसी अनुभवी प्रॉपर्टी वकील की मदद लेना भी फायदेमंद हो सकता है।
होम लोन और अतिरिक्त खर्चों का बजट बनाएं
घर की कीमत के अलावा स्टांप ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन शुल्क, जीएसटी, पार्किंग, रखरखाव और अन्य शुल्क भी बजट में शामिल करें। निर्माणाधीन फ्लैट के मामले में बैंक आमतौर पर निर्माण की प्रगति के अनुसार लोन की राशि किस्तों में जारी कर सकते हैं। जारी हो चुकी रकम पर लागू शर्तों के अनुसार ब्याज या प्री-ईएमआई देय हो सकती है। इसलिए लोन की शर्तों को अच्छी तरह समझें और अपनी मासिक आय के अनुसार ईएमआई तय करें।
बेटियों के पुश्तैनी संपत्ति अधिकार
प्रॉपर्टी खरीदने या परिवार में संपत्ति का बंटवारा करने से पहले उत्तराधिकार के नियमों की जानकारी भी आवश्यक है। हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) अधिनियम, 2005 के तहत मिताक्षरा संयुक्त हिंदू परिवार की पैतृक संपत्ति में बेटियों को बेटों के समान सहदायिक अधिकार दिए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 2020 में *विनीता शर्मा बनाम राकेश शर्मा* मामले में स्पष्ट किया कि इन अधिकारों के लिए पिता का 9 सितंबर 2005 को जीवित होना जरूरी नहीं है। नवरात्रि और दिवाली पर नया घर खरीदना परिवार के लिए खुशी और नई शुरुआत का अवसर होता है। लेकिन शुभ मुहूर्त में रजिस्ट्री कराने के साथ दस्तावेजों की जांच करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। बुकिंग से पहले स्वामित्व, RERA रजिस्ट्रेशन, कारपेट एरिया, बिल्डर एग्रीमेंट और कुल खर्चों की पुष्टि करें। सही जानकारी के साथ लिया गया निर्णय आपके नए आशियाने को भविष्य की मजबूत आर्थिक संपत्ति बनाने में मदद कर सकता है।