क्या है 'छेदीलाल' की कहानी? जानें बाघों के संरक्षण की सच्चाई
अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस पर बाघों की कहानी
World Tiger Day (Image Credit-Social Media)
World Tiger Dayलखनऊ: अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश में मानव-वन्यजीव संघर्ष की एक उल्लेखनीय घटना फिर से चर्चा में है। 2016 में पीलीभीत के जंगलों से पकड़े गए एक आदमखोर रॉयल बंगाल टाइगर, जिसे 'छेदीलाल' नाम दिया गया, को लखनऊ चिड़ियाघर में जीवनभर के लिए रखा गया था।
35 दिनों का आतंक: 'छेदीलाल' का शिकार
स्थान: पीलीभीत का जंगल, वर्ष 2016। यह घटना उत्तर प्रदेश के सबसे भयावह मानव-वन्यजीव संघर्षों में से एक मानी जाती है। एक वयस्क रॉयल बंगाल टाइगर ('छेदीलाल') ने 35 दिनों में 8 ग्रामीणों को अपना शिकार बना लिया। इस बाघ की दहशत इतनी बढ़ गई थी कि लोग शाम होते ही अपने घरों में कैद हो जाते थे।
शूट-एट-साइट का आदेश: वन विभाग की टीम ने इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए काफी प्रयास किए, लेकिन अंततः बाघ को देखते ही गोली मारने का आदेश जारी करना पड़ा। हालांकि, विशेषज्ञों की टीम ने उसे ट्रेंकुलाइज़र के जरिए पकड़ लिया।
क्वारंटाइन के बाद 'उम्रकैद' का फैसला
लखनऊ चिड़ियाघर के निदेशक संजय कुमार बिश्वाल ने बताया कि जब छेदीलाल को पकड़ा गया, तब उसकी उम्र लगभग 10 वर्ष थी। उसे लखनऊ चिड़ियाघर में लाकर 45 दिनों तक सख्त निगरानी में रखा गया।
जंगल में वापसी पर रोक: NTCA के नियमों के अनुसार, आदमखोर बाघों को जंगल में छोड़ना खतरनाक होता है। इसलिए यह तय किया गया कि 'छेदीलाल' चिड़ियाघर में ही रहेगा।
अनाथ शावकों को मिला सहारा
पीलीभीत के जंगलों से चार अनाथ शावकों—साक्षी, सिब्बा, अभि और शेरखान को भी लखनऊ चिड़ियाघर लाया गया था। इनकी मां की मौत जंगल में बाघों के बीच लड़ाई में हुई थी।
पुनर्वास: इनमें से तीन शावकों को लखनऊ चिड़ियाघर में रखा गया, जबकि एक को दूसरे चिड़ियाघर में भेजा गया। वर्तमान में लखनऊ चिड़ियाघर में 12 बाघ हैं, जिनमें 9 रॉयल बंगाल टाइगर और 3 सफेद बाघ शामिल हैं।
आदमखोर और अनाथ बाघों के लिए नियम
लखनऊ चिड़ियाघर के निदेशक के अनुसार, भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम और NTCA के दिशा-निर्देश हैं:
आदमखोर बाघ: जो बाघ इंसानों पर हमला कर चुका हो, उसे हमेशा के लिए चिड़ियाघर में रखा जाता है।
अन्य शावक: जो शावक अनाथ हो जाते हैं या शिकार करने में असमर्थ होते हैं, उन्हें चिड़ियाघर में आश्रय दिया जाता है।
अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस की जानकारी
हर साल 29 जुलाई को विश्व बाघ दिवस मनाया जाता है। इसकी शुरुआत 2010 में रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में हुई थी।
भारत में 'प्रोजेक्ट टाइगर' 1973 में शुरू हुआ था, और वर्तमान में दुनिया के जंगली बाघों की 75 प्रतिशत आबादी भारत में है। उत्तर प्रदेश में कई प्रमुख टाइगर रिजर्व हैं।