क्या आप जानते हैं Murli Manohar Joshi की पत्नी Tarla Joshi की अनकही कहानी?
Tarla Joshi: एक अद्वितीय जीवनसाथी
Tarla Joshi: किसी भी राजनेता की सफलता में उनकी पत्नी का योगदान अत्यधिक महत्वपूर्ण होता है। मेरे जीवन में, मेरी पत्नी तरला जोशी ने हर कदम पर मेरा साथ दिया है। आज मैं उनके साथ बिताए जीवन के कुछ खास लम्हों को साझा करना चाहता हूँ।
मेरी ताकत और सहारा
मैं अपनी पत्नी पर गर्व महसूस करता हूँ। हमारी उपलब्धियों से हमारे रिश्ते की मजबूती का पता चलता है। उन्होंने कभी मुझसे कोई शिकायत नहीं की और न ही मेरी विचारधारा पर असहमति जताई। मेरे देर से घर लौटने या काम के सिलसिले में बाहर रहने की बातों को उन्होंने हमेशा सहजता से स्वीकार किया।
तरला जी ने घर की देखभाल के साथ-साथ मेहमानों का भी अच्छे से स्वागत किया। जब मैं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और जनसंघ के कार्यों में व्यस्त रहता था, तब वह सबका ध्यान रखती थीं। आज मैं जहाँ हूँ, उसमें तरला जी का योगदान अनमोल है।
आपातकाल की चुनौतियाँ और धैर्य
तरला जी में अपार धैर्य है। शादी के तुरंत बाद उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी ताकि मेरी राजनीतिक गतिविधियों में सहयोग कर सकें। आपातकाल के दौरान, जब मुझे मीसा के तहत गिरफ्तार किया गया, तब उन्होंने परिवार को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
जब मैं जेल में था, तब तरला जी ने हमारी लड़ाई को जारी रखा। उन्होंने न केवल अन्य मीसा बंदियों के परिवारों की मदद की, बल्कि उन्हें अपने घर में भी रखा।
विचारों की समानता और अटूट विश्वास
एक घटना से यह स्पष्ट होता है कि तरला जी की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण रही है। जब मैंने स्नातक के पाठ्यक्रम में सामान्य अंग्रेजी की अनिवार्यता का विरोध किया, तो उन्होंने बिना किसी संकोच के उस नियुक्ति पत्र को अस्वीकार कर दिया।
जब मैं 'एकता यात्रा' पर जा रहा था, तब उन्होंने मुझे जाने से नहीं रोका, बल्कि मेरा हौसला बढ़ाया। यह दर्शाता है कि हमारी विचारधारा में कितनी गहराई है।
समाज सेवा और 'शुचिता' का संकल्प
तरला जी मेरी राजनीतिक गतिविधियों में हमेशा मेरे साथ रहीं। उन्होंने 'शुचिता' नामक एक स्वयंसेवी संस्था की स्थापना की, जो गरीब महिलाओं को स्वावलंबी बनाने में मदद करती है।
इस संस्था के माध्यम से उन्होंने कई महिलाओं के उत्पादों को बाजार में पहुँचाने का कार्य किया है।
साहित्यिक रुचि और पारिवारिक जीवन
तरला जी को पढ़ने का बहुत शौक है और वह हिंदी तथा अंग्रेजी साहित्य में गहरी रुचि रखती हैं। हमारे घर का माहौल हमेशा से साहित्यिक रहा है।
वह एक कुशल गृहणी भी हैं और स्वादिष्ट शाकाहारी व्यंजन बनाती हैं। उनके हाथ का बना पारंपरिक पहाड़ी 'रस' सभी को पसंद आता है।
भारतीय संस्कृति और रिश्तों की मजबूती
तरला जी भारतीय संस्कृति में गहरी आस्था रखती हैं। वह धार्मिक हैं, लेकिन संकीर्णता से दूर रहती हैं। हम दोनों एक-दूसरे के अच्छे आलोचक हैं और समाज, राजनीति पर खुलकर चर्चा करते हैं।
उनकी आत्मीयता ने हमारे संसदीय क्षेत्र के लोगों से गहरा संबंध स्थापित किया है। आज मैं जहाँ भी हूँ, उसमें तरला जी का योगदान महत्वपूर्ण है।