कौन हैं 'एम्बुलेंस दादा' करीमुल हक? जानें उनकी प्रेरणादायक कहानी
पद्म श्री करीमुल हक की जीवनी
पद्म श्री करीमुल हक की जीवनी: पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के मालबाजार ब्लॉक में स्थित धलाबाड़ी नामक एक छोटा सा गाँव है। यह क्षेत्र 'डूअर्स' के चाय बागानों के बीच बसा हुआ है। यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता अद्भुत है, लेकिन बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। उफनती नदियाँ, कच्ची पगडंडियाँ और घने जंगल हैं। इस क्षेत्र में अगर कोई बीमार पड़ जाए, तो अस्पताल पहुँचने में कठिनाई होती है। ऐसे पिछड़े इलाके में करीमुल हक, एक साधारण चाय बागान श्रमिक, ने पिछले 25 वर्षों से 20 से अधिक गाँवों के लिए 'देवदूत' का काम किया है। लोग उन्हें प्यार से 'एम्बुलेंस दादा' कहते हैं।
एक दर्दनाक अनुभव से मिली प्रेरणा
करीमुल हक की सेवा का संकल्प एक व्यक्तिगत त्रासदी से उपजा। 1995 में, उनकी माँ की तबीयत अचानक बिगड़ गई और उन्हें दिल का दौरा पड़ा। करीमुल ने गाँव के रईसों से मदद मांगी, लेकिन कोई भी उनकी मदद के लिए आगे नहीं आया। सरकारी एम्बुलेंस भी नहीं आई, और उनकी माँ ने उनके सामने दम तोड़ दिया। इस घटना ने करीमुल को गहरे आक्रोश में डाल दिया और उन्होंने कसम खाई कि वह किसी और को ऐसा दर्द नहीं सहने देंगे।
पुरानी मोटरसाइकिल से शुरू हुआ सफर
करीमुल ने अपनी आर्थिक स्थिति को देखते हुए एक पुरानी मोटरसाइकिल खरीदी। एक दिन, जब उनके साथी श्रमिक को अचानक बेहोशी आई, तो उन्होंने उसे अपनी पीठ पर लादकर अस्पताल पहुँचाया। इस घटना ने उन्हें यह समझाया कि उनकी मोटरसाइकिल ही इस कठिन इलाके में सबसे प्रभावी एम्बुलेंस हो सकती है। उन्होंने अपनी बाइक को मुफ्त एम्बुलेंस के रूप में इस्तेमाल करना शुरू किया।
सामाजिक चुनौतियों का सामना
जब करीमुल ने यह सेवा शुरू की, तो समाज ने उनका मजाक उड़ाया। लेकिन उन्होंने अपने काम को जारी रखा और अपनी मामूली आय का अधिकांश हिस्सा बाइक के पेट्रोल और दवाओं पर खर्च किया। चाहे रात हो या दिन, करीमुल हमेशा तैयार रहते थे।
कई कठिनाइयों का सामना
करीमुल ने कई बार जंगली हाथियों और कीचड़ में फंसने जैसी कठिनाइयों का सामना किया। एक बार, उन्होंने एक ज़हरीले सांप को पकड़कर डॉक्टर को पहचानने में मदद की। धीरे-धीरे, लोगों का मजाक सम्मान में बदल गया। अब तक, उन्होंने 6,000 से अधिक लोगों की जान बचाई है। 2017 में, उन्हें भारत सरकार द्वारा 'पद्म श्री' से सम्मानित किया गया। आज, 'एम्बुलेंस दादा' ने अपने घर के एक हिस्से को अस्पताल में बदल दिया है, जहाँ मुफ्त चिकित्सा कैंप लगते हैं।