कान्स में गुजराती फिल्म 'लालो' ने रच दिया नया इतिहास, जानें इसकी खासियतें!
गुजराती सिनेमा का नया अध्याय
मुंबई, 15 मई (वेब वार्ता)। ब्लॉकबस्टर गुजराती फिल्म 'लालो' ने कान्स फिल्म फेस्टिवल में पहुँचकर एक नई उपलब्धि हासिल की है। इस फिल्म की टीम ने विश्व के सबसे प्रतिष्ठित सिनेमाई मंचों में से एक पर भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए गुजराती सिनेमा को एक नई पहचान दी है।
'लालो' उन चुनिंदा गुजराती फिल्मों में से एक बन गई है, जिसने क्षेत्रीय कहानियों को वैश्विक स्तर पर पहुँचाने का कार्य किया है।
यह उपलब्धि भारतीय सिनेमा, मिट्टी से जुड़ी वास्तविक कहानियों और देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाली कहानियों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने का उत्सव है। फिल्म की टीम ने दर्शकों के समर्थन और प्यार के लिए आभार व्यक्त किया, जिसके कारण यह यात्रा संभव हो सकी।
निर्देशक अंकित साखिया ने कहा, 'लालो- श्री कृष्ण सदा सहायते' का कान्स फिल्म फेस्टिवल में प्रतिनिधित्व करना हमारे लिए गर्व का क्षण है। हमें विश्वास है कि हमारी भाषा और संस्कृति ने हमें यहाँ तक पहुँचाया है।
हालांकि हम इतने बड़े नाम नहीं हैं कि अपनी समृद्ध संस्कृति को पूरी तरह से प्रस्तुत कर सकें, लेकिन 'लालो' के माध्यम से गुजरात और उसकी आध्यात्मिकता की झलक दुनिया के सामने लाना हमारे लिए गर्व की बात है। हमें उम्मीद है कि यह फिल्म भाषा और सीमाओं को पार कर लोगों के दिलों को छू सकेगी।
फिल्म के प्रोड्यूसर्स अजय बलवंत पडरिया, जय व्यास और जिगर दलसानिया ने कहा कि उनकी कोशिश हमेशा यही रही है कि यह कहानी अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचे।
सिनेमा तब विशेष बनता है जब वह दर्शकों के दिलों तक पहुँचता है और बातचीत का कारण बनता है। कान्स फिल्म फेस्टिवल तक पहुँचना हमारे सपने की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है, जहाँ हम 'लालो' के माध्यम से अपनी संस्कृति और भावनाओं को वैश्विक दर्शकों तक पहुँचा सकें।
इस फिल्म का निर्माण मैनिफेस्ट फिल्म्स, जय व्यास प्रोडक्शंस, जिगर दलसानिया, पार्थिव जोधाणी और अजय बलवंत पडरिया द्वारा किया गया है, जिसमें रीवा राछ, श्रुहद गोस्वामी और करण जोशी ने मुख्य भूमिकाएँ निभाई हैं।
शुभम गज्जर ने फिल्म में डायरेक्टर ऑफ फोटोग्राफी (डीओपी) और क्रिएटिव प्रोड्यूसर की भूमिका निभाई है। 'लालो- श्री कृष्ण सदा सहायते' रविवार, 17 मई को दोपहर एक बजे केवल सोनी मैक्स पर प्रसारित होगा।