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दीया मिर्जा ने साझा किया पानी की कमी पर चिंताजनक वीडियो, क्या है सामाजिक न्याय?

अभिनेत्री दीया मिर्जा ने विश्व सामाजिक न्याय दिवस पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें उन्होंने भारत में जल संकट और उसके गंभीर प्रभावों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि लगभग 6 करोड़ लोग पानी की कमी का सामना कर रहे हैं और यह सामाजिक न्याय के लिए एक बड़ा सवाल है। दीया ने पर्यावरण की रक्षा और मानवता के लिए न्याय की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका संदेश है कि विकास केवल कागज पर नहीं, बल्कि वास्तविकता में भी सुरक्षित और न्यायपूर्ण होना चाहिए।
 

दीया मिर्जा का पर्यावरण के प्रति जागरूकता का संदेश


मुंबई, 20 फरवरी। अभिनेत्री दीया मिर्जा न केवल अभिनय में सक्रिय हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के लिए भी काम कर रही हैं। विश्व सामाजिक न्याय दिवस के अवसर पर, उन्होंने एक भावुक वीडियो इंस्टाग्राम पर साझा किया, जिसमें उन्होंने देश में जल संकट और उसके गंभीर परिणामों पर चिंता व्यक्त की।


दीया ने वीडियो में कहा, "हम एक ऐसे देश में रहते हैं, जहां लगभग 6 करोड़ लोग पानी की गंभीर कमी का सामना कर रहे हैं और तीन चौथाई भूमि अपनी उपजाऊता खो रही है। ऐसे में मुझे बार-बार यह सोचने पर मजबूर होना पड़ता है कि असली सामाजिक न्याय क्या है?"


उन्होंने भारत की प्रगति की सराहना की, जिसमें चरम गरीबी में कमी और ग्रामीण-शहरी विभाजन में कमी शामिल है। लेकिन उन्होंने सवाल उठाया, "अगर हमारे कुएं सूख जाएं, तो ये आंकड़े कितने महत्वपूर्ण हैं?"


दीया ने कहा कि इंसान की असली गरिमा केवल धन से नहीं, बल्कि भूमि की सेहत, नदियों के प्रवाह और प्रकृति की जीवनदायिनी क्षमता से मापी जाती है। उन्होंने चेतावनी दी, "मैं भविष्य की बात नहीं कर रही, बल्कि आज की स्थिति पर ध्यान दिला रही हूं।"


उन्होंने लिखा, "इस दिवस का संदेश हमें केवल नए वादे नहीं, बल्कि साहस भी मांगता है। गरीबी समाप्त करने और सभी को साथ लाने के साथ-साथ यह समझना जरूरी है कि पर्यावरण के बिना सामाजिक न्याय अधूरा है।"


दीया ने आगे कहा कि साफ हवा, पीने का पानी और उपजाऊ भूमि किसी अमीरी की चीज नहीं, बल्कि हर व्यक्ति का जन्मजात अधिकार है। भारत की विकास यात्रा केवल कागज पर नहीं, बल्कि वास्तविकता में भी सुरक्षित और न्यायपूर्ण होनी चाहिए।


अभिनेत्री ने सभी से अपील की, "हमें ऐसा विकास चुनना होगा जो मानवता और प्रकृति दोनों की रक्षा करे, क्योंकि न्याय की शुरुआत प्रकृति के न्याय से होती है।"