क्या नसीरुद्दीन शाह के मामले में कट्टरता का संकेत है? मौलाना शहाबुद्दीन रजवी का बयान
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी का नसीरुद्दीन शाह पर बयान
बरेली, 5 फरवरी। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने अभिनेता नसीरुद्दीन शाह से जुड़े एक विवाद पर अपनी राय व्यक्त की है। हाल ही में, नसीरुद्दीन शाह को एक विश्वविद्यालय के कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया था, लेकिन बाद में उन्हें आमंत्रण नहीं दिया गया। आयोजकों ने दावा किया कि अभिनेता ने कार्यक्रम में भाग लेने से मना कर दिया।
इस मामले में दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं, और मौलाना रजवी ने इस पर अपनी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यदि नसीरुद्दीन शाह के साथ ऐसा व्यवहार किया गया है, तो यह सांप्रदायिकता या कट्टरता का संकेत है। उनका कहना था, "नसीरुद्दीन शाह भारत में एक प्रसिद्ध व्यक्ति हैं, और उनकी बातों को सुनना आवश्यक है। किसी भी चीज को देशद्रोह के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।"
उन्होंने आगे कहा, "यदि कोई सरकार की आलोचना करता है, तो यह संविधान के दायरे में आता है। नसीरुद्दीन शाह के साथ जो हुआ, यदि उसकी आलोचना की जाती है, तो यह सांप्रदायिकता का संकेत है।"
मौलाना ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि सीएम आदित्यनाथ उत्तराखंड और असम के मुख्यमंत्रियों की तरह मुसलमानों को परेशान नहीं करते हैं। उनका ध्यान विकास पर है और वे उत्तर प्रदेश को एक उत्तम प्रदेश बनाना चाहते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री ने मदरसों को बंद करने का कोई आदेश नहीं दिया है और न ही उन्हें ब्लॉक किया है।
मौलाना ने कहा, "कुछ घटनाएं हुई हैं, लेकिन उनका आदेश उच्च न्यायालय या जिला न्यायालय से संबंधित रहा है। मुख्यमंत्री ने ऐसा कोई आदेश नहीं दिया है।"