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अनिक दत्ता की असामयिक मृत्यु पर सीएम सुवेंदु अधिकारी का बयान: रहस्यमय हालात की जांच होनी चाहिए

प्रसिद्ध बंगाली फिल्म निर्माता अनिक दत्ता की अचानक मृत्यु ने पश्चिम बंगाल में शोक की लहर पैदा कर दी है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने इस पर गहरा दुख व्यक्त किया और कोलकाता पुलिस से रहस्यमय हालात की जांच की मांग की। अनिक दत्ता की फिल्में और उनके बेबाक विचार उन्हें सिनेमा जगत में एक महत्वपूर्ण स्थान दिलाते हैं। उनकी मृत्यु के कारणों की जांच जारी है, जिससे उनके प्रशंसकों और फिल्म इंडस्ट्री में चिंता बढ़ गई है।
 

अनिक दत्ता का निधन: बंगाली सिनेमा में शोक की लहर




कोलकाता, 27 मई। प्रसिद्ध बंगाली फिल्म निर्माता और राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अनिक दत्ता की अचानक मृत्यु ने पश्चिम बंगाल में शोक की लहर पैदा कर दी है। इस घटना पर मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने अपनी संवेदनाएं व्यक्त की हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट साझा करते हुए अनिक दत्ता के निधन पर गहरा दुख प्रकट किया।


सीएम ने अपने पोस्ट में लिखा, ''अनिक दत्ता की अचानक मृत्यु से मैं दुखी हूं। उनका योगदान बंगाली सिनेमा में अतुलनीय है। उनके परिवार और मित्रों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं। मुझे विश्वास है कि कोलकाता पुलिस उनकी मृत्यु के पीछे के रहस्यमय हालात की जांच करेगी।''


सूत्रों के अनुसार, अनिक दत्ता कोलकाता के गरियाहाट स्थित अपने घर की छत से गिर गए थे। उन्हें तुरंत ढाकुरिया के एक निजी अस्पताल में ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। हालांकि, उनकी मृत्यु के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। क्या यह एक दुर्घटना थी या इसके पीछे कोई और कारण है, यह स्पष्ट नहीं है।


पुलिस ने घटनास्थल को घेर लिया है और आसपास के लोगों से पूछताछ शुरू कर दी है।


अनिक दत्ता के निधन की खबर सुनते ही बंगाली फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई। कई प्रमुख कलाकारों जैसे अभिनेत्री श्रीलेखा मित्रा, अभिनेता रुद्रनील घोष और निर्देशक अरिंदम सिल ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।


अनिक दत्ता को 2012 में रिलीज हुई फिल्म 'भूतेर भबिष्यत' से व्यापक पहचान मिली, जिसमें उन्होंने राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर तीखा कटाक्ष किया। इसके बाद उन्होंने 'आश्चर्य प्रदीप', 'मेघनाद बध रहस्य', 'बरुण बाबू के दोस्त' और 'अपराजितो' जैसी कई सफल फिल्मों का निर्देशन किया। 'अपराजितो' के लिए उन्हें 2024 में दो राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिले।


वे अपने बेबाक विचारों के लिए भी जाने जाते थे और अक्सर पश्चिम बंगाल की राजनीति और सरकारी व्यवस्था पर सवाल उठाते थे।