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शक्ति मोहन का नया प्रोजेक्ट: 'डांस अक्रॉस द वर्ल्ड' में रूस के लोकनृत्य की खोज!

शक्ति मोहन ने अपने नए यूट्यूब प्रोजेक्ट 'डांस अक्रॉस द वर्ल्ड' के माध्यम से रूस के लोकनृत्य की अनोखी खोज की है। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य पारंपरिक नृत्य शैलियों को आज की युवा पीढ़ी से जोड़ना है। शक्ति ने इस यात्रा में अपने अनुभवों को साझा किया है, जिसमें उन्होंने रूस की समृद्ध नृत्य परंपराओं का अन्वेषण किया। जानें इस प्रोजेक्ट के पीछे की प्रेरणा और शक्ति का जुनून।
 

शक्ति मोहन का वैश्विक सांस्कृतिक सफर


मुंबई, 22 फरवरी। आज के समय में, जब वैश्वीकरण के चलते पारंपरिक कला और नृत्य धीरे-धीरे पीछे हटते जा रहे हैं, कुछ कलाकार ऐसे हैं जो इन्हें नए तरीके से प्रस्तुत कर रहे हैं। इसी दिशा में भारतीय डांस की प्रसिद्ध कलाकार शक्ति मोहन ने अपने विशेष यूट्यूब प्रोजेक्ट 'डांस अक्रॉस द वर्ल्ड' के माध्यम से एक अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक यात्रा शुरू की है।


यह यात्रा केवल भौगोलिक सीमाओं को पार करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विभिन्न संस्कृतियों को समझने और उन्हें युवा पीढ़ी से जोड़ने का प्रयास भी है।


हाल ही में शक्ति मोहन ने 'डांस अक्रॉस द वर्ल्ड' का एक नया एपिसोड जारी किया, जिसमें उन्होंने रूस की समृद्ध लोकनृत्य परंपराओं का अन्वेषण किया। इस एपिसोड की लॉन्चिंग पर उनके करीबी मित्र, परिवार और उद्योग के कई लोग उपस्थित थे, जिन्होंने उनके इस दृष्टिकोण की सराहना की।


शक्ति मोहन ने इस प्रोजेक्ट को अपने सपनों का प्रोजेक्ट बताते हुए कहा, "मैं चाहती हूं कि हजारों साल पुरानी लोकनृत्य शैलियों को आज की पीढ़ी तक पहुंचाया जाए। पहले सीजन में मैंने विभिन्न देशों की यात्रा की, जहां मैंने पारंपरिक नृत्यों को सीखा और उन्हें दर्शकों के सामने प्रस्तुत किया।"


उन्होंने आगे कहा, "दुनिया में कई खूबसूरत नृत्य परंपराएं हैं जो धीरे-धीरे भुला दी जा रही हैं। इन कला रूपों को बचाने के लिए जरूरी है कि उन्हें इस तरह से प्रस्तुत किया जाए कि युवा उनसे जुड़ाव महसूस करें। मेरे लिए यह शो बहुत खास है। मैं खुद को भाग्यशाली मानती हूं कि मुझे यात्रा और नृत्य, दोनों का अनुभव एक साथ करने का मौका मिला।"


रूस के लोकनृत्य को शक्ति मोहन ने अपने करियर के सबसे अनोखे और चुनौतीपूर्ण अनुभवों में से एक बताया। उन्होंने कहा, "रूसी नृत्य अपनी तकनीक, गति और भाव-भंगिमा में अद्वितीय है। एक भारतीय डांसर के रूप में, यह मेरे लिए विशेष अनुभव रहा। मुझे भरतनाट्यम जैसी शास्त्रीय नृत्य शैलियों में रुचि है, जिसमें पैरों की जटिल थाप और सटीक मुद्राएं महत्वपूर्ण होती हैं, जबकि रूसी नृत्य की भाषा अलग है। इसलिए इसे जल्दी सीखना और मंच पर प्रस्तुत करना मेरे लिए चुनौतीपूर्ण रहा।"


उन्होंने कहा, "रूस में लोगों का अपनापन मेरे लिए सबसे यादगार रहा। वहां की एक कोरियोग्राफर मेरी मेहनत से इतनी प्रभावित हुईं कि उन्होंने मुझे पारंपरिक हेडगियर उपहार में दिया। यह उपहार मेरे लिए दो संस्कृतियों के बीच के सम्मान और जुड़ाव का प्रतीक है। भले ही भारतीय और रूसी नृत्य शैलियां भिन्न हों, लेकिन उनमें खूबसूरत फ्यूजन की संभावनाएं हैं।"