योगेश: हिंदी सिनेमा के अमर गीतकार जिनकी रचनाएं आज भी दिल को छूती हैं
योगेश का जीवन और उनके अमिट गीत
नई दिल्ली, 18 मार्च। हिंदी फिल्म उद्योग ने कई प्रतिभाशाली गीतकारों को देखा है, जिनमें से एक हैं योगेश। उनकी रचनाएं आज भी लोगों के दिलों में बसी हुई हैं, भले ही वे अब हमारे बीच नहीं हैं। उनके गीत जैसे 'जिंदगी कैसी है पहेली, हाय' और 'कहीं दूर जब दिन ढल जाए' समय की कसौटी पर खरे उतरे हैं।
योगेश का जन्म 19 मार्च 1943 को लखनऊ, उत्तर प्रदेश में हुआ। उनकी जयंती पर, हम उनकी सरल yet गहरी रचनाओं को याद करते हैं, जो जीवन के अनुभवों से प्रेरित थीं। उनका सिद्धांत था कि 'जो देखा, जो जिया, वही लिखा'। वे विशेष रूप से लिखने की कोशिश नहीं करते थे, बल्कि अपने अनुभवों को शब्दों में ढालते थे। यही उनकी सहजता उनके गीतों को लोकप्रिय बनाती थी।
उनके गीतों में जीवन की खुशियों, दर्द, प्यार और अलगाव को इस तरह से पिरोया गया है कि हर कोई खुद को उनमें देख सकता है।
योगेश ने अपने करियर की शुरुआत 1962 में फिल्म 'सखी रॉबिन' से की, जिसमें उन्होंने छह गीत लिखे, जिनमें से 'तुम जो आ गए' मन्ना डे द्वारा गाया गया। यह गाना उनके करियर की पहली सफलता बना। इसके बाद, उन्होंने महान निर्देशकों जैसे हृषिकेश मुखर्जी और बसु चटर्जी के साथ काम किया और कई क्लासिक फिल्मों के लिए गीत लिखे।
उनका सबसे यादगार काम 1971 की फिल्म 'आनंद' में था, जिसमें अमिताभ बच्चन और राजेश खन्ना थे। योगेश ने इस फिल्म के लिए 'कहीं दूर जब दिन ढल जाए' और 'जिंदगी कैसी है पहेली' जैसे गीत लिखे, जो जीवन की सच्चाई और भावनाओं को खूबसूरती से व्यक्त करते हैं। 'आनंद' के इन गीतों ने उन्हें हिंदी सिनेमा में अमिट पहचान दिलाई।
योगेश ने 'रजनीगंधा' में 'रजनीगंधा फूल तुम्हारे', 'कई बार यूं भी देखा है', और 'रिमझिम गिरे सावन' जैसे गीत भी लिखे। 'मिली' में 'आए तुम याद मुझे', 'बड़ी सूनी सूनी है', और 'छोटी सी बात' में 'ना बोले तुम ना मैंने कुछ कहा' जैसे गाने भी उनके नाम हैं। 'बातों बातों में' और 'मंजिल' में भी उनके गीतों ने लोगों का दिल जीता।
गीतों के अलावा, योगेश ने धारावाहिकों के लिए भी लेखन किया। उनके योगदान के लिए उन्हें यश भारती पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 29 मई 2020 को 77 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया, लेकिन उनके गीत आज भी जीवित हैं।