दीया मिर्जा ने विश्व पर्यावरण दिवस पर उठाई जलवायु परिवर्तन की गंभीरता की आवाज़
पर्यावरण संरक्षण के प्रति दीया मिर्जा की अपील
मुंबई, 5 जून। बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री दीया मिर्जा ने हमेशा पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे पर अपनी आवाज़ उठाई है। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन अब केवल एक पर्यावरणीय समस्या नहीं रह गई है, बल्कि यह लोगों के स्वास्थ्य, जीवनशैली और सामाजिक न्याय से भी गहराई से जुड़ चुका है। उन्होंने सभी से अनुरोध किया कि वे छोटे-छोटे बदलावों के माध्यम से पर्यावरण की रक्षा में योगदान दें।
इस अवसर पर बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (बीएमसी) ने क्लाइमेट बजट 2026-27 का अनावरण किया, जिसमें दीया मिर्जा भी शामिल थीं। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में जलवायु परिवर्तन और इसके सामाजिक प्रभावों पर गहन चर्चा हुई। यह समझना आवश्यक है कि जलवायु परिवर्तन केवल मौसम में बदलाव नहीं लाता, बल्कि इसका प्रभाव समाज के हर वर्ग पर पड़ता है, विशेषकर उन लोगों पर जो संसाधनों की कमी का सामना कर रहे हैं।
दीया ने कहा, 'जलवायु परिवर्तन जैसी गंभीर समस्या का समाधान केवल सरकारों या संस्थाओं के प्रयासों से नहीं होगा। इसके लिए समाज, प्रशासन, उद्योग और आम नागरिकों को मिलकर काम करना होगा। यदि हम अपने जलवायु लक्ष्यों को हासिल करना चाहते हैं, तो हमें एकजुट होकर प्रयास करना होगा।'
अभिनेत्री ने आगे कहा, 'आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में लोग कई बार पर्यावरणीय मुद्दों को अनदेखा कर देते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि जलवायु परिवर्तन का असर हर व्यक्ति पर प्रतिदिन महसूस हो रहा है। बढ़ती गर्मी, पानी की कमी, खराब हवा और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं अब हर शहर और परिवार की चिंता बन चुकी हैं। इसलिए अब केवल चर्चा का समय नहीं है, बल्कि समाधान अपनाने का समय है।'
दीया मिर्जा ने कार्यक्रम में कुछ ऐसे उपायों का भी उल्लेख किया जिन्हें लोग अपनी दैनिक जिंदगी में आसानी से अपना सकते हैं। उन्होंने विशेष रूप से सिंगल-यूज प्लास्टिक के उपयोग को कम करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा, 'यदि लोग प्लास्टिक की बोतलों या सिंगल-यूज उत्पादों का उपयोग कम करें, तो इसका पर्यावरण पर बड़ा सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। यदि मेरी इस आदत से हजारों प्लास्टिक की बोतलों को पर्यावरण में जाने से रोका जा सकता है, तो सोचिए करोड़ों लोगों के ऐसा करने से कितना बड़ा बदलाव आ सकता है। पर्यावरण संरक्षण की शुरुआत व्यक्तिगत जिम्मेदारी से होती है, क्योंकि जो पर्यावरण के साथ हो रहा है, वही हमारे साथ भी हो रहा है।'