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क्या ए. आर. रहमान का हिंदी सिनेमा में काम न मिलने का कारण है कम्युनलिज्म?

ए. आर. रहमान ने हाल ही में हिंदी सिनेमा में काम की कमी के पीछे कम्युनलिज्म को जिम्मेदार ठहराया है, जिससे राजनीतिक हलकों में बहस छिड़ गई है। पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग ने उनके बयान का समर्थन किया, जबकि भाजपा के नेताओं ने इसे झूठा बताया। जानें इस मुद्दे पर और क्या प्रतिक्रियाएं आई हैं और क्या यह सच में सिनेमा में जातिवाद का संकेत है।
 

ए. आर. रहमान का विवादास्पद बयान


दिल्ली, 16 जनवरी। ऑस्कर पुरस्कार विजेता और मशहूर संगीतकार ए. आर. रहमान ने हाल ही में हिंदी फिल्म उद्योग में काम की कमी के पीछे कम्युनलिज्म को जिम्मेदार ठहराया है। उनके इस बयान ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है।


दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग ने रहमान के विचारों का समर्थन किया है, जबकि भाजपा के कुछ नेताओं और केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने इसे झूठा करार दिया है।


रामदास आठवले ने कहा, "मुझे नहीं लगता कि ए. आर. रहमान के आरोपों में कोई सच्चाई है। फिल्म उद्योग में कई मुस्लिम कलाकार हैं, जैसे सलमान खान, शाहरुख खान और आमिर खान, जिन्हें दर्शकों का प्यार मिलता है। संभव है कि नए कलाकारों की आमद के कारण उन्हें कम काम मिल रहा हो। हिंदी सिनेमा में जातिवाद जैसी कोई चीज नहीं है, यह केवल एक झूठ है।"


पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग ने कहा, "यह सच है कि कई मुसलमानों को उनके धर्म के कारण काम नहीं मिलता। इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और हमें इस मुद्दे को सुलझाने के लिए काम करना चाहिए।"


भाजपा विधायक जितेंद्र कुमार गोठवाल ने कहा, "हालांकि यह फिल्म उद्योग से जुड़ा मामला है, लेकिन मुझे लगता है कि अब उद्योग में पारदर्शिता बढ़ी है। पहले सिफारिशों पर काम मिलता था, लेकिन अब हुनर और मेहनत के आधार पर काम दिया जा रहा है।"


भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष सैयद भाषा ने कहा, "ए. आर. रहमान का कहना है कि उन्हें भाजपा सरकार के तहत अवसर नहीं मिले, लेकिन यह गलत है। उन्होंने कई सफल फिल्में दी हैं और उनकी प्रतिभा के कारण उन्हें पहचान मिलती रहेगी।"


उन्होंने यह भी कहा कि शाहरुख खान को फिल्म 'जवान' के लिए नेशनल बेस्ट एक्टर अवॉर्ड मिला, क्योंकि उनकी फिल्म सफल रही। यह साबित करता है कि सत्ताधारी पार्टियों का हस्तक्षेप हिंदी सिनेमा में नहीं होता।