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अनूप जलोटा ने साझा की पंडित जसराज की यादें: 'जमाईराज' का प्यार और सम्मान

अनूप जलोटा ने पंडित जसराज की छठी पुण्यतिथि पर उनके साथ बिताए खास लम्हों को साझा किया। जलोटा ने बताया कि कैसे पंडित जसराज ने उन्हें 'जमाईराज' कहकर पुकारा और उनके रिश्ते की गहराई को दर्शाया। उन्होंने एक भावुक घटना का जिक्र किया जब पंडित जसराज उनके भजन सुनकर भावुक हो गए थे। इस लेख में जानें पंडित जसराज के संगीत के प्रति जलोटा की श्रद्धा और उनके रिश्ते की अनमोल यादें।
 

पंडित जसराज की पुण्यतिथि पर अनूप जलोटा की भावुक बातें

मुंबई, 18 अगस्त। महान शास्त्रीय गायक पंडित जसराज की छठी पुण्यतिथि के अवसर पर, गायक और संगीतकार अनूप जलोटा ने एक विशेष बातचीत में पंडित जसराज से जुड़ी कई यादगार और भावुक क्षणों को साझा किया।

अनूप जलोटा ने बताया कि पंडित जसराज उन्हें प्यार से 'जमाईराज' कहते थे। दरअसल, उनकी पत्नी ने पंडित जसराज से संगीत की शिक्षा ली थी, जिसके कारण उन्हें यह नाम दिया गया था।

उन्होंने कहा, ''पंडित जसराज के साथ मेरे पिता का भी गहरा संबंध था, और हमारे परिवारों के बीच एक मजबूत बंधन रहा है।''

पुण्यतिथि पर पंडित जसराज को याद करते हुए अनूप ने कहा, ''यह मेरे लिए एक ऐसा अवसर है जब मैं इस महान संगीतकार को याद कर सकता हूं और उनके संगीत की मिठास को फिर से अनुभव कर सकता हूं। उनके सुरों का प्रभाव आज भी लोगों के दिलों में गूंजता है।''

अनूप जलोटा ने कहा, ''पंडित जसराज से मुझे हमेशा अपार प्रेम और सम्मान मिला। हमारे बीच का रिश्ता परिवार जैसा था, और मैं आशा करता हूं कि यह हमेशा बना रहेगा।''

पंडित जसराज से जुड़ी अपनी सबसे खास याद साझा करते हुए अनूप जलोटा ने हैदराबाद में एक घटना का जिक्र किया। उन्होंने कहा, ''एक बार मैं वहां भजन गा रहा था और पंडित जसराज मुझे सुन रहे थे। जब मैंने गाना शुरू किया, तो वह इतने भावुक हो गए कि उनकी आंखों से आंसू बहने लगे।''

उन्होंने आगे कहा, ''पंडित जसराज को मेरा भजन 'कभी-कभी भगवान को भी भक्तों से काम पड़े' बहुत पसंद आया। जब मैं भजन की अंतिम पंक्ति गा रहा था, तब उनकी आंखों में आंसू आ गए। वह मंच पर आए और अपनी खूबसूरत मोतियों की माला मेरे गले में डाल दी। यह पल मेरे जीवन का सबसे बड़ा आशीर्वाद है।''

पंडित जसराज भारतीय शास्त्रीय संगीत के सबसे प्रतिष्ठित नामों में से एक रहे हैं। वह मेवाती घराने से संबंधित थे और लगभग 75 वर्षों तक संगीत की दुनिया में सक्रिय रहे। उन्होंने अपनी गायकी से न केवल भारत में, बल्कि विदेशों में भी भारतीय शास्त्रीय संगीत की पहचान को मजबूत किया।