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अनुपम खेर ने साझा किया दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे की यादगार लोकेशन का अनुभव

अनुपम खेर ने हाल ही में एक वीडियो साझा किया, जिसमें वह उस स्थान पर शूटिंग कर रहे हैं, जहां 1995 की हिट फिल्म 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे' का मशहूर ट्रेन सीन फिल्माया गया था। उन्होंने इस अनुभव को बेहद भावुक बताया और कहा कि वहां खड़े होकर ऐसा लगा जैसे समय थम गया हो। अनुपम ने इस फिल्म के लिए यश चोपड़ा और आदित्य चोपड़ा का धन्यवाद किया और इस स्थान को एक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की इच्छा व्यक्त की। जानें उनके अनुभव और यादें इस खास लोकेशन से जुड़ी।
 

अनुपम खेर का भावुक वीडियो




मुंबई, 11 मई। हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के प्रसिद्ध अभिनेता अनुपम खेर ने हाल ही में एक वीडियो साझा किया, जिसमें वह उस स्थान पर शूटिंग कर रहे हैं, जहां 1995 की हिट फिल्म 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे' का मशहूर ट्रेन सीन फिल्माया गया था। उन्होंने बताया कि वहां खड़े होकर उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे समय थम गया हो।


अनुपम खेर, जिन्होंने इस फिल्म में शाहरुख खान के पिता धर्मवीर मल्होत्रा का किरदार निभाया था, ने इस खास मौके का एक वीडियो साझा किया।


वीडियो में अनुपम कहते हैं, "मैं एक रेलवे स्टेशन पर हूं। यहां 36 साल पहले एक आइकॉनिक फिल्म का सीन शूट किया गया था। यह भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक महत्वपूर्ण क्षण है, जिसे हर भारतीय ने देखा और याद किया है।"


इस सीन को याद करते हुए उन्होंने कहा, "यह दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे का सीन है, जिसमें सिमरन दौड़ती है। अमरीश पुरी कहते हैं, 'जा सिमरन जा, जी ले अपनी जिंदगी।' और सिमरन दौड़ती हुई ट्रेन की ओर बढ़ती है। यह जगहें बेहद खास हैं और चोपड़ा परिवार के साथ बिताए अच्छे समय की यादें ताजा हो गईं।"


अनुपम ने दिवंगत यश चोपड़ा और उनके बेटे आदित्य को इस फिल्म का हिस्सा बनाने के लिए धन्यवाद दिया।


उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि डीडीएलजे की इस लोकेशन पर 36 साल बाद शूटिंग करना एक भावुक और यादगार अनुभव था। उन्हें ऐसा लगा जैसे समय की धारा थम गई हो।


उन्होंने यह भी कहा कि उस समय उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि शाहरुख और काजोल का यह सीन भारतीय सिनेमा के सबसे यादगार लम्हों में से एक बन जाएगा।


अनुपम ने अपनी इच्छा व्यक्त की कि महाराष्ट्र सरकार इस स्थान को एक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करे, क्योंकि ऐसी फिल्म लोकेशन लोगों की यादों और भावनाओं का हिस्सा बन जाती हैं।


उन्होंने अंत में कहा कि हमें सिनेमा की इस विरासत को उसी सम्मान के साथ संजोना चाहिए। जादू केवल फिल्मों में नहीं होता, बल्कि कुछ स्थानों में भी बस जाता है।