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सिंटा विवाद: वर्षा उसगांवकर ने उठाए गंभीर सवाल, क्या है असली सच?

अभिनेत्री वर्षा उसगांवकर ने सिंटा विवाद में गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसमें उन्होंने संगठन के कर्मचारियों पर मिलीभगत का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की वफादारी संगठन के प्रति नहीं है। इस विवाद में कई अन्य सदस्य भी शामिल हैं, और हाल ही में अदालत ने सिंटा को अवमानना का नोटिस जारी किया है। जानें इस विवाद की पूरी कहानी और इसके पीछे के तथ्य।
 

सिंटा के भीतर चल रहा विवाद

मुंबई, 29 अक्टूबर। अभिनेत्री वर्षा उसगांवकर ने हाल ही में सिने एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन (सिंटा) के कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि ये कर्मचारी पूनम ढिल्लों और पद्मिनी कोल्हापुरे के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। वर्षा ने बताया कि जब उन्होंने संगठन के फंड के बारे में जानकारी मांगी, तो कर्मचारियों ने सही उत्तर देने से इनकार कर दिया।


वर्षा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि किसी भी संगठन के कर्मचारियों को संगठन के प्रति वफादार रहना चाहिए, न कि किसी विशेष समिति के सदस्य के प्रति, जो सिंटा के कर्मचारियों के मामले में नहीं दिखाई देता।


उन्होंने कहा, "कर्मचारियों की वफादारी संगठन के प्रति होनी चाहिए, न कि कार्यकारी समिति के किसी सदस्य के प्रति। हमें यह पता चला है कि लेखाकार की वफादारी संगठन के प्रति बहुत कम है।"


सिंटा की सावधि जमा और निधियों के बारे में पूछे जाने पर लेखाकार ने टालमटोल भरे जवाब दिए, जैसे 'मुझे नहीं पता' या 'मैं उस दिन छुट्टी पर था'।


वर्षा ने कहा, "फिक्स्ड डिपॉजिट का मामला मुझे लूट जैसा लगा। यह सदस्यों का पैसा है। उनकी अनुमति के बिना कोई इसे कैसे छू सकता है?"


गौरतलब है कि सिंटा विवाद कुछ महीने पहले शुरू हुआ था, जब 21 सदस्यीय कार्यकारी समिति के 11 सदस्यों ने तानाशाही कार्यप्रणाली का आरोप लगाते हुए इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद दो गुटों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला शुरू हुआ।


उपासना सिंह ने आरोप लगाया कि पूनम ढिल्लों और पद्मिनी कोल्हापुरे ने एसोसिएशन की फिक्स्ड डिपॉजिट को तोड़कर धनराशि निकाल ली।


हालांकि, पूनम ढिल्लों ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि सिंटा के वित्तीय रिकॉर्ड कार्यकारी समिति के सदस्यों के लिए उपलब्ध हैं।


इस विवाद में एक नया मोड़ तब आया जब अदालत ने सिंटा को अवमानना के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया। अदालत ने सिंटा को निर्देश दिया है कि वह 20 अक्टूबर के चुनाव परिणामों पर कोई कार्रवाई न करे, जिसमें पद्मिनी कोल्हापुरे और पूनम ढिल्लों ने अधिकतम वोट प्राप्त किए थे।