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साध्वी हर्षा रिछारिया ने धर्म की राह छोड़ी, आत्महत्या के ख्यालों का किया खुलासा

साध्वी हर्षा रिछारिया, जो महाकुंभ में प्रसिद्ध हुईं, ने धर्म की राह छोड़ने का निर्णय लिया है। उन्होंने पिछले एक साल में मानसिक परेशानियों का सामना करते हुए आत्महत्या के विचारों का जिक्र किया। हर्षा ने कहा कि समाज और धर्म के लोग उनके चरित्र को तय कर रहे हैं। मकर संक्रांति के अवसर पर नर्मदा नदी में स्नान करने के अनुभव को भी साझा किया। जानें उनके विचार और अनुभवों के बारे में।
 

साध्वी हर्षा रिछारिया का नया मोड़




जबलपुर, 14 जनवरी। महाकुंभ में साध्वी के रूप में पहचान बनाने वाली हर्षा रिछारिया एक बार फिर चर्चा में हैं। उन्होंने धर्म के मार्ग को छोड़ने का निर्णय लिया है।


उनका कहना है कि पिछले एक साल में उन्हें इतनी मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा कि आत्महत्या के विचार उनके मन में आने लगे। साध्वी हर्षा ने एक विशेष बातचीत में संत समाज पर तीखा हमला किया।


एंकरिंग और मॉडलिंग में वापसी की इच्छा रखने वाली हर्षा रिछारिया ने कहा, "मेरे लिए उस क्षेत्र में कुछ भी गलत नहीं था। बस कुछ शोर था, आध्यात्मिक और पश्चिमी दोनों तरह का। लोग मुझे एंकर और अभिनेत्री के रूप में पहचानते थे, और मेरी असली पहचान वहीं से शुरू हुई।"


उन्होंने आगे कहा कि वे नहीं चाहती थीं कि ऐसा हो, लेकिन कभी-कभी इंसान को इतना तोड़ दिया जाता है कि उसे अपना रास्ता बदलना पड़ता है। उन्होंने कहा, "यह मेरी मजबूरी है। मेरे मान, सम्मान और गरिमा को तोड़ने की कोशिश की गई है।"


हर्षा ने कहा कि पिछले एक साल में उन्होंने इतनी मानसिक परेशानी झेली है कि कई बार आत्महत्या के विचार आए। उन्होंने स्पष्ट किया, "मैं कोई सीता नहीं हूं, जो हर बार परीक्षा दूं। मेरी सहने की एक सीमा है।"


मकर संक्रांति के अवसर पर नर्मदा नदी में स्नान करने पहुंची हर्षा ने कहा कि यह सब भगवान की इच्छा से हुआ। उन्होंने कहा, "मकर संक्रांति के पवित्र अवसर पर नर्मदा नदी के तट पर जाना मेरे लिए एक अद्भुत अनुभव था।"