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विशाल जेठवा ने जीता 'ब्रेकआउट परफॉर्मेंस ऑफ द ईयर' अवार्ड, जानें उनकी सफलता की कहानी!

विशाल जेठवा ने अपने शानदार अभिनय के लिए 'ब्रेकआउट परफॉर्मेंस ऑफ द ईयर' अवार्ड जीता है। उनकी फिल्म 'होमबाउंड' ने वैश्विक स्तर पर सराहना प्राप्त की है। जानें उनके करियर की शुरुआत और इस फिल्म की कहानी के बारे में।
 

विशाल जेठवा की नई उपलब्धि


मुंबई, 24 मार्च। अभिनेता विशाल जेठवा ने अपने बेहतरीन अभिनय से दर्शकों का दिल जीत लिया है। चाहे वह फिल्म 'होमबाउंड' में चंदन कुमार का किरदार हो या 'मर्दानी 2' में खतरनाक विलेन का रोल, उन्होंने हर भूमिका को इतनी गहराई से निभाया है कि सभी उनके फैन बन गए हैं।


हाल ही में, उन्हें हैलो! हॉल ऑफ फेम अवार्ड्स 2026 में 'ब्रेकआउट परफॉर्मेंस ऑफ द ईयर' का प्रतिष्ठित पुरस्कार मिला है।


विशाल ने अपने फैंस के साथ इस खुशी को साझा करते हुए इंस्टाग्राम पर कुछ तस्वीरें साझा कीं, जिनमें उनकी मुस्कान और खुशी स्पष्ट दिखाई दे रही थी। उन्होंने लिखा, "'ब्रेकआउट परफॉर्मेंस ऑफ द ईयर।'"


'हैलो! हॉल ऑफ फेम अवार्ड्स 2026' भारत के सबसे प्रमुख ग्लैमर और उत्कृष्टता पुरस्कारों में से एक है, जो मनोरंजन, व्यवसाय और फैशन की दुनिया की हस्तियों को सम्मानित करता है।


विशाल ने अपने करियर की शुरुआत छोटे पर्दे से की थी, लेकिन आज वह बॉलीवुड के प्रमुख अभिनेताओं में गिने जाते हैं। उन्होंने टीवी सीरियल 'भारत का वीर पुत्र-महाराणा प्रताप' से अपने करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद कई धारावाहिकों में काम किया और 2019 में 'मर्दानी 2' में विलेन (सनी) के रूप में अपनी पहचान बनाई। उन्होंने 'सलाम वेंकी' और 'टाइगर 3' जैसी फिल्मों में भी काम किया है, लेकिन 'होमबाउंड' से उन्हें विशेष लोकप्रियता मिली।


'होमबाउंड' को पहले टॉप 15 फिल्मों की सूची में शामिल किया गया था, हालांकि वह अंतिम पांच में नहीं पहुंच पाई। फिर भी, फिल्म ने वैश्विक स्तर पर काफी सराहना प्राप्त की है। इसे कान्स फिल्म फेस्टिवल और टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में प्रदर्शित किया गया था, जहां इसे स्टैंडिंग ओवेशन मिला।


नीरज घयवान द्वारा निर्देशित इस फिल्म में ईशान खट्टर, विशाल जेठवा और जाह्नवी कपूर मुख्य भूमिकाओं में हैं। कहानी दो बचपन के दोस्तों की है, जो पुलिस बनने का सपना देखते हैं। शोएब (ईशान) और चंदन (विशाल) दोनों मुस्लिम और दलित समुदाय से हैं और सरकारी नौकरी के सपने देखते हैं, लेकिन गरीबी और जातिवाद के कारण उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।