लता मंगेशकर और पीएम मोदी का अनोखा रिश्ता: एक पारिवारिक बंधन की कहानी
लता मंगेशकर: एक अद्वितीय आवाज की कहानी
नई दिल्ली, 28 सितंबर (वेब वार्ता)। "नाम गुम जाएगा, चेहरा ये बदल जाएगा। मेरी आवाज ही पहचान है, गर याद रहें।" यह वाक्य हिंदुस्तान की सबसे प्रिय गायिका लता मंगेशकर की कहानी को बयां करता है, जिन्हें सभी प्यार से 'लता दीदी' के नाम से जानते हैं। उन्हें 'स्वर साम्राज्ञी' और 'भारत की कोकिला' जैसे उपाधियों से नवाजा गया। संगीत उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा था, और उनके गाने न केवल भारत में, बल्कि पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों में भी लोकप्रिय रहे। उनके कई गाने आज भी हर पीढ़ी की जुबान पर हैं।
लता का करियर और राजनीतिक संबंध
28 सितंबर 1929 को इंदौर में जन्मी लता मंगेशकर ने 1940 के दशक में अपने करियर की शुरुआत की और 36 से अधिक भाषाओं में हजारों गाने गाए। कला के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें 2001 में 'भारत रत्न' से सम्मानित किया गया। इसके अलावा, लता मंगेशकर का राजनीतिक जीवन भी काफी दिलचस्प रहा, खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनके संबंध।
पिछले एक दशक में, लता मंगेशकर ने प्रधानमंत्री मोदी और उनकी पार्टी भाजपा का समर्थन किया। नवंबर 1999 में, भाजपा के समर्थन से उन्हें राज्यसभा के लिए चुना गया, जहां वह 2005 तक रहीं। 2013 में, उन्होंने मोदी को प्रधानमंत्री पद के लिए समर्थन दिया। उनके रिश्ते में भाई-बहन जैसा बंधन था।
भाई-बहन जैसा रिश्ता
लता मंगेशकर ने पीएम मोदी को 'नरेंद्र भाई' कहकर संबोधित किया। हर साल रक्षाबंधन पर वह उन्हें राखी भेजती थीं। किताब 'मोदी@20: ड्रीम्स मीट डिलीवरी' में लता ने पीएम मोदी के साथ अपनी मुलाकातों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने मोदी को एक पारंपरिक राजनेता के रूप में नहीं, बल्कि एक काम करने वाले नेता के रूप में देखा।
लता ने कहा, "नरेंद्र भाई ऐसे राजनेता नहीं हैं जिनकी हम आम तौर पर कल्पना करते हैं। उनके मकसद अलग हैं। उनका लक्ष्य भारत के लोगों के लिए कुछ करना है।"
विशेष पल और पत्र
2013 में, जब मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने पुणे में दीनानाथ मंगेशकर अस्पताल का उद्घाटन किया। लता ने कहा था, "मैं प्रार्थना करती हूं कि हम नरेंद्र भाई को प्रधानमंत्री के रूप में देखें।"
लता ने 2014 में मोदी को एक पत्र भेजा, जिसमें उन्होंने उनके शपथ ग्रहण समारोह में शामिल न हो पाने के लिए माफी मांगी थी। पत्र के साथ उन्होंने 'मंगल-मूर्ति' गणेश की मूर्ति भी भेजी थी।
अंतिम विदाई
लता मंगेशकर ने 6 फरवरी 2022 को इस दुनिया को अलविदा कहा, लेकिन उनकी आवाज आज भी अमर है। उनके और पीएम मोदी के बीच का रिश्ता केवल औपचारिक नहीं था, बल्कि एक पारिवारिक बंधन की तरह था।