×

रिया चक्रवर्ती को मिली बड़ी राहत, कोर्ट ने फ्रीज किए बैंक अकाउंट्स को अनफ्रीज करने का दिया आदेश

रिया चक्रवर्ती को सुशांत सिंह राजपूत से जुड़े ड्रग्स मामले में बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने उनके और उनके परिवार के बैंक खातों को अनफ्रीज करने का आदेश दिया है। यह फैसला जांच एजेंसी द्वारा कानूनी प्रक्रिया का पालन न करने के कारण आया है। जानें इस मामले की पूरी कहानी और कोर्ट के आदेश के पीछे की वजह।
 

कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला


मुंबई, 26 अप्रैल। सुशांत सिंह राजपूत से जुड़े ड्रग्स मामले में अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती को एक महत्वपूर्ण राहत मिली है। नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) स्पेशल कोर्ट ने रिया चक्रवर्ती, उनके भाई शोविक चक्रवर्ती और मां संध्या चक्रवर्ती के बैंक खातों को अनफ्रीज करने का आदेश दिया है।


इस निर्णय के बाद, परिवार को आईसीआईसीआई बैंक, एक्सिस बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक में अपने खातों तक पहुंच प्राप्त होगी।


यह आदेश 25 अप्रैल 2026 को सुनाया गया, जिसमें कोर्ट ने कहा कि जांच एजेंसी नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने कानूनी प्रक्रिया का सही तरीके से पालन नहीं किया। अदालत ने यह भी पाया कि एनडीपीएस एक्ट की धारा 68एफ के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।


इस कानून के अनुसार, किसी संपत्ति या बैंक खाते को फ्रीज करने के बाद 30 दिनों के भीतर सक्षम प्राधिकारी से मंजूरी लेना आवश्यक है, लेकिन इस मामले में यह प्रक्रिया पूरी नहीं की गई।


कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर आवश्यक मंजूरी नहीं ली जाती है, तो ऐसे फ्रीजिंग आदेश कानूनी रूप से मान्य नहीं रह जाते।


इस मामले की शुरुआत 2020 में सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु के बाद हुई थी। उस समय जांच के दौरान ड्रग्स का एंगल सामने आया, जिसमें रिया चक्रवर्ती और उनके भाई शोविक का नाम शामिल था। इसके बाद नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने उनके बैंक खातों को फ्रीज कर दिया था।


एजेंसी का तर्क था कि जांच के दौरान वित्तीय लेनदेन पर रोक लगाना आवश्यक है, ताकि किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ या सबूतों को प्रभावित होने से रोका जा सके।


हालांकि, रिया चक्रवर्ती ने इस कार्रवाई के खिलाफ लगातार कानूनी चुनौती दी। उनका कहना था कि बैंक खातों को फ्रीज करने में आवश्यक कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और यह कदम बिना उचित मंजूरी के उठाया गया।


मामला अदालत में पहुंचा, जहां कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि प्रक्रिया में खामी के कारण यह कार्रवाई बेअसर है।