मुमताज़ का जादुई सफर: 70 और 80 के दशक की स्टार के अनकहे किस्से
मुमताज़ का जन्मदिन: एक अद्भुत यात्रा
79 वर्ष की उम्र में मुमताज़, जो 70 और 80 के दशक की एक प्रमुख अभिनेत्री रही हैं, आज अपने जन्मदिन का जश्न मना रही हैं। उस समय उनकी फिल्मों में पहने गए कपड़े फैशन के प्रतीक बन जाते थे। उनकी खूबसूरती ने यश चोपड़ा और शम्मी कपूर जैसे दिग्गजों को भी शादी के प्रस्ताव देने से नहीं रोका, लेकिन मुमताज़ ने अपने करियर को प्राथमिकता दी। एक समय ऐसा भी था जब शशि कपूर और जितेंद्र ने उन्हें बी-ग्रेड फिल्मों में काम करने के कारण अस्वीकार कर दिया था। उनके जन्मदिन के अवसर पर, आइए जानते हैं उनके जीवन और करियर से जुड़ी कुछ अनसुनी बातें।
किस्सा 1: लता मंगेशकर के साथ बचपन
मुमताज़ का जन्म 31 जुलाई 1947 को हैदराबाद में हुआ था। उनके पिता एक ड्राई फ्रूट विक्रेता थे और परिवार का संबंध ईरान से था। जब मुमताज़ केवल एक वर्ष की थीं, उनके माता-पिता का तलाक हो गया। उनकी माँ ने फिल्मों में जूनियर आर्टिस्ट के रूप में काम किया और मुमताज़ को अकेले ही पाला। परिवार बाद में मुंबई आ गया, जहां मुमताज़ अक्सर अपनी माँ के साथ फिल्म सेट पर जाती थीं। उन्होंने केवल पांच साल की उम्र में चाइल्ड आर्टिस्ट के रूप में अपने करियर की शुरुआत की।
किस्सा 2: माँ की मृत्यु की खबर
जब मुमताज़ 12 वर्ष की थीं, उन्हें अपनी माँ के निधन की खबर फिल्म सेट पर मिली। उस समय, उन्होंने डायरेक्टर से पूछा, "क्या मैं जा सकती हूँ?" इसके बाद, उन्होंने अपने परिवार की जिम्मेदारियों को संभालना शुरू कर दिया। 13 साल की उम्र में, उन्हें फिल्म *ज़मीन के तारे* में एक महत्वपूर्ण भूमिका मिली।
किस्सा 3: महमूद का ऑफर
14 साल की उम्र में, मुमताज़ ने फिल्म *गहरा दाग* में काम किया। इसके बाद, उन्हें 1963 की फिल्म *फ़ौलाद* में लीड रोल मिला। महमूद ने उनकी खूबसूरती को देखकर उन्हें कई फिल्मों में कास्ट किया, लेकिन शशि कपूर ने उन्हें बी-ग्रेड एक्ट्रेस कहकर रिजेक्ट कर दिया।
किस्सा 4: दिलीप कुमार के साथ काम
महमूद ने दिलीप कुमार को मुमताज़ के साथ काम करने की सलाह दी। दिलीप कुमार ने उनकी खूबसूरती की तारीफ की और उन्हें फिल्म *राम और श्याम* में कास्ट किया। यह फिल्म हिट रही और मुमताज़ को पहचान मिली।
किस्सा 5: जीतेंद्र का विरोध
फिल्म *बूंद जो बन गई मोती* में मुमताज़ को लीड रोल मिला, लेकिन जीतेंद्र ने इसका विरोध किया। डायरेक्टर ने कहा, "मुमताज़ ही हीरोइन होगी।"
किस्सा 6: अमिताभ बच्चन के लिए मर्सिडीज़ छोड़ना
जब अमिताभ बच्चन ने मुमताज़ के साथ फिल्म *बंधे हाथ* में काम किया, तब वह एक साधारण कार में आते थे, जबकि मुमताज़ मर्सिडीज़ में आती थीं। एक दिन, मुमताज़ ने अपनी कार अमिताभ को दे दी।
किस्सा 7: शम्मी कपूर का प्रस्ताव
मुमताज़ और शम्मी कपूर के बीच प्यार पनपने लगा, लेकिन राज कपूर ने मुमताज़ को फिल्म *मेरा नाम जोकर* से हटा दिया।
किस्सा 8: देव आनंद के साथ काम
मुमताज़ ने फिल्म *तेरे मेरे सपने* में देव आनंद के साथ काम किया। बाद में, उन्हें *हरे रामा हरे कृष्णा* में देव साहब की बहन का रोल ऑफर किया गया, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया।
किस्सा 9: राजेश खन्ना की नाराजगी
राजेश खन्ना और मुमताज़ की गहरी दोस्ती थी। जब मुमताज़ किसी अन्य अभिनेता के साथ फिल्म साइन करती थीं, तो राजेश नाराज हो जाते थे।
किस्सा 10: शादी के बाद करियर का अंत
मुमताज़ ने अपने करियर के पीक पर शादी की और फिल्मों को अलविदा कह दिया। उनके परिवार ने उनसे काम करने से मना किया।
किस्सा 11: शम्मी कपूर से अंतिम मुलाकात
2010 में, मुमताज़ को शम्मी कपूर की पत्नी का फोन आया। शम्मी ने उनसे मिलने की इच्छा जताई, और जब वे मिलीं, तो मुमताज़ भावुक हो गईं।