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महिलाओं की सुरक्षा पर साकिब सलीम का कड़ा संदेश: क्या हम सच में समझते हैं?

महिलाओं की सुरक्षा एक गंभीर मुद्दा बन चुका है, जिस पर अभिनेता साकिब सलीम ने अपनी नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक नोट साझा किया, जिसमें उन्होंने उन लोगों को एक दिन के लिए लड़की बनने की सलाह दी, जो लड़कियों के कपड़ों पर टिप्पणी करते हैं। इस मुद्दे पर कई अन्य सेलेब्स, जैसे प्रियंका चोपड़ा और कृति सेनन, भी अपनी आवाज उठा चुके हैं। जानें इस विषय पर और क्या कहा गया है।
 

महिलाओं की सुरक्षा पर बढ़ती चिंताएं

मुंबई, 28 सितंबर। देश में महिलाओं की सुरक्षा एक गंभीर मुद्दा बन चुका है। जहां एक ओर लोग सुरक्षा उपायों पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर महिलाओं के पहनावे और उनके व्यवहार पर भी टिप्पणियां की जा रही हैं। इस संदर्भ में, अभिनेता साकिब सलीम ने अपनी नाराजगी व्यक्त की है।


साकिब ने अपने इंस्टाग्राम पर एक नोट साझा किया, जिसमें उन्होंने उन लोगों को एक दिन के लिए लड़की बनने की सलाह दी, जो लड़कियों के कपड़ों और उनके रहन-सहन पर टिप्पणी करते हैं।


उन्होंने लिखा, "पहले इनको इंसान समझो, फिर हाथ लगाने की इजाजत मांगो। कहते हैं कपड़े छोटे थे, 'वो खुद ही चाहती थी'। यह छोटी कपड़ों की बात नहीं है, बल्कि तुम्हारी सोच है। चाहे स्कर्ट हो या साड़ी, इस देश की महिलाएं खतरे में हैं। एक दिन तो इस देश में एक लड़की बनकर देखो।"


यह पहली बार नहीं है जब किसी सेलेब्रिटी ने महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं। प्रियंका चोपड़ा, फरहान अख्तर जैसे कई सितारे पहले भी इस मुद्दे पर अपनी आवाज उठा चुके हैं। दिशा पाटनी की बहन खूशबू पाटनी भी अक्सर इस विषय पर अपने विचार साझा करती हैं। हाल ही में, उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए थे।


अभिनेत्री कृति सेनन ने डॉटर्स डे पर लड़कियों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा कि क्यों हमेशा लड़कियों को लाइव लोकेशन शेयर करने, पेपर स्प्रे रखने और रात में कैब बुक करने जैसी सावधानियां बरतनी पड़ती हैं? उनका मानना है कि असली जश्न तब होगा जब बेटियां बिना किसी डर के रात में अकेले चल सकेंगी।


कृति ने इंस्टाग्राम पर एक नोट में लिखा, "लाइव लोकेशन शेयर करने से लेकर, पेपर स्प्रे रखने तक, हमने लड़कियों की जिंदगी को ऐसा बना दिया है कि ये सब उनकी रोजमर्रा की आदत बन गई है। जिस दिन कोई बेटी रात में अकेले घर जा सकेगी, अंधेरे में पार्क में बैठ सकेगी, अपनी मर्जी के कपड़े पहन सकेगी, बिना डरे सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल कर सकेगी, तब हमें सच में 'बेटी दिवस' मनाना चाहिए।"