×

मनोज मुंतशिर का 50वां जन्मदिन: रंगमंच पर हाउसफुल शो से मिली अनोखी खुशी!

मनोज मुंतशिर ने अपने 50वें जन्मदिन पर रंगमंच पर एक अद्वितीय उपलब्धि हासिल की। उनके नाटक 'कृष्ण-राधा से रणभूमि तक' के पहले दो शो हाउसफुल रहे, जिसमें 4000 दर्शकों ने भाग लिया। मनोज ने इस सफलता का श्रेय अपनी टीम को दिया और अपने दर्शकों के प्रति आभार व्यक्त किया। जानें इस खास दिन की सभी महत्वपूर्ण बातें और मनोज की भावनाएं।
 

मनोज मुंतशिर की रंगमंच पर सफलता


मुंबई, 28 फरवरी। प्रसिद्ध गीतकार और लेखक मनोज मुंतशिर ने अपने 50वें जन्मदिन पर एक विशेष उपलब्धि का जश्न मनाया। उनके द्वारा लिखित और निर्देशित नाटक ‘कृष्ण-राधा से रणभूमि तक’ के पहले दो शो रंगमंच पर प्रदर्शित हुए, और दोनों ही शो में दर्शकों की भारी भीड़ रही।


मनोज ने अपने इंस्टाग्राम पर एक भावुक संदेश साझा करते हुए बताया कि 4000 दर्शकों की उपस्थिति में तालियों से गूंजता यह दिन उनके लिए ईश्वर का सबसे बड़ा उपहार था। उन्होंने लिखा, “हाउसफुल ऑडिटोरियम में और सीटें कहां से लाएं? यह रंगमंच के इतिहास में एक अद्वितीय घटना थी। पहले दिन 4000 दर्शक आए, जिन्होंने तालियों और अपनी भावनाओं के साथ मुझे अमूल्य आशीर्वाद दिया। 50वें जन्मदिन पर इससे बेहतर क्या हो सकता था।”


उन्होंने इस सफलता का श्रेय अपनी टीम को दिया, यह कहते हुए कि उनका चेहरा केवल एक प्रतीक है, असली मेहनत टीम की है। उन्होंने अपने बड़े भाई अशोक पंडित का आभार व्यक्त किया, जिन्होंने उनके दृष्टिकोण पर विश्वास किया और सारेगामा के विक्रम मेहरा को इस सपने से जोड़ा। अपनी पत्नी नीलम मुंतशिर को “पहली प्रेमिका, पत्नी, दोस्त और अब कंपनी की डायरेक्टर” बताते हुए कहा कि उन्होंने हर भूमिका में उनका साथ दिया।


मनोज ने अपनी टीम के अन्य सदस्यों की भी सराहना की। उन्होंने पुनीत जे पाठक की स्टेजक्राफ्ट, वीर कानाबार, निधि वर्मा, विराट भरद्वाज और कुंवर अंशित की संगीत प्रतिभा की प्रशंसा की। कॉस्ट्यूम डिजाइनर अम्बरीश कपाड़िया को भी उनके योगदान के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने रवि लालपुरिया और डॉक्टर गौतम भंसाली जैसे भाइयों का भी जिक्र किया, जो हमेशा उनके साथ खड़े रहे। अपनी टीम के सभी सदस्यों को दिल से धन्यवाद दिया।


अंत में, मनोज ने दर्शकों को संबोधित करते हुए कहा, “मैं कोई अभिनेता, गायक, राजनेता या फिल्म स्टार नहीं हूं, लेकिन आपने मुझे कभी कम महसूस नहीं होने दिया। मेरी कमियों को नजरअंदाज कर बार-बार सराहा। जन्म-जन्मांतर तक आपका ऋणी रहूंगा।”