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मनहर उधास: कैसे एक छोटे से बच्चे ने भारतीय संगीत को दी मखमली आवाज?

मनहर उधास की कहानी एक छोटे से बच्चे से शुरू होती है, जिसने केएल सहगल की आवाज से प्रेरित होकर संगीत की दुनिया में कदम रखा। 1943 में जन्मे मनहर ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की, लेकिन संगीत के प्रति उनकी दीवानगी ने उन्हें बॉलीवुड का प्रमुख गायक बना दिया। उनके हिट गाने और गुजराती गजलों में योगदान ने उन्हें एक अद्वितीय पहचान दिलाई। आज भी, 83 वर्ष की उम्र में, वे लाइव कॉन्सर्ट्स में सक्रिय हैं। जानें उनके जीवन की प्रेरणादायक यात्रा के बारे में।
 

एक अद्भुत यात्रा की शुरुआत


यह कहानी 1950 के दशक की है, जब सौराष्ट्र के सावरकुंडला में एक सात वर्षीय बच्चा स्कूल जाने के लिए नदी पार करता था। रास्ते में उसे अक्सर एक रेडियो से महान गायक केएल सहगल की गहरी आवाज सुनाई देती थी। उस आवाज का जादू उसे इस कदर प्रभावित करता था कि उसने अपने पिता से उस गीत का रिकॉर्ड खरीदने की जिद की, भले ही उनके घर में ग्रामोफोन नहीं था। वह रोज उस रिकॉर्ड को पड़ोसी के घर ले जाकर घंटों तक सुनता।


मनहर उधास का जन्म और परिवार

मनहर उधास का जन्म 13 मई 1943 को बड़ौदा राज्य (अब गुजरात) में हुआ। उनके परिवार में कला और शिक्षा का अनूठा संगम था। उनके पिता, केशुभाई उधास, एक सरकारी अधिकारी थे और 'इसराज' (दिलरुबा) बजाने में माहिर थे, जबकि उनकी मां, जीतूबेन, एक उत्कृष्ट गायिका थीं।


शिक्षा और करियर की शुरुआत

हालांकि उस समय संगीत को करियर बनाना आसान नहीं था, मनहर ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। 1965 में जब वे मुंबई पहुंचे, तो उनकी जिंदगी दो हिस्सों में बंट गई। दिन में वे एक टेक्सटाइल कंपनी में इंजीनियर के रूप में काम करते थे और शाम को 'फेमस स्टूडियोज' में एक अघोषित 'स्क्रैच' सिंगर बन जाते थे।


बॉलीवुड में कदम

1969 में, फिल्म 'विश्वास' के एक गीत की रिकॉर्डिंग के दौरान, महान गायक मुकेश अनुपस्थित थे। संगीत निर्देशकों ने मनहर से डमी ट्रैक गवाया, सोचकर कि बाद में मुकेश इसे गाएंगे। लेकिन जब मुकेश ने मनहर की रिकॉर्डिंग सुनी, तो वे हैरान रह गए। गाना मनहर के नाम से रिलीज हुआ और रातों-रात हिट हो गया।


संगीत में सफलता का सफर

1970 से 90 के दशक के बीच, मनहर उधास की आवाज बॉलीवुड में सबसे पसंदीदा बन गई। सुभाष घई और लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के साथ उनके सहयोग ने कई हिट गाने दिए। 'हीरो' (1983) में उनकी आवाज ने जैकी श्रॉफ के किरदार को जीवंत किया।


गुजराती गजलों की ओर रुख

अपने करियर के चरम पर, मनहर उधास ने बॉलीवुड से दूरी बना ली और गुजराती गजलों के पुनर्जागरण में जुट गए। उन्होंने अपने गजलों को उच्च-स्तरीय प्रोडक्शन वैल्यू दी। 1975 में उनका एल्बम 'सूरज ढलती सांज' और 1986 में टी-सीरीज के साथ 'आगमन' ने रिकॉर्ड तोड़ दिए।


आज भी सक्रिय

83 वर्ष की आयु में भी, मनहर उधास आज भी राजकोट से टेक्सास (यूएसए) तक लाइव कॉन्सर्ट्स में पूरी ऊर्जा के साथ प्रदर्शन कर रहे हैं।